हादसे के बाद सभी मृतकों की पहचान कराना पुलिस के लिए काफी मुश्किल हो रहा है। पहचान के लिए चार शवों की डीएनए जांच कराई जा सकती है। ये चारों ही शव क्षत-विक्षत अवस्था में हैं। इनमें से तीन एलएनजेपी और एक लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के शवगृह में हैं। हालांकि सोमवार को फॉरेंसिक पोस्टमार्टम के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी।
एलएनजेपी अस्पताल के डॉ. पीएस भंडारी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद वे रविवार सुबह ही अस्पताल पहुंच गए थे। ज्यादातर लोग आग नहीं, बल्कि धुएं के शिकार होने के कारण अस्पताल में आए हैं। बर्न विभाग में 9 में से एक को छोड़ बाकी 3 से 5 फीसदी ही जले हैं।
इन लोगों से बातचीत में उन्हें पता चला कि धुएं में दम घुटने से ये बेहोश हो गए थे। इसके बाद आग की चपेट में आए। वहीं शवों को अस्पताल तक लाई पुलिस के अनुसार ज्यादातर केस दम घुटने से मौत के लग रहे हैं। 21 घायलों में से 3 ही सबसे ज्यादा आग की चपेट में आए हैं। वहीं, मृत 43 में से करीब 7 शव ऊपरी तौर पर आग की चपेट में आए थे। ये अनुमान पुलिस और दोनों ही अस्पतालों के डॉक्टरों ने लगाया है।