फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली अग्निकांड : भतीजे के शव की शिनाख्त होते ही बिलख पड़े हाकिम

Mon, 09 Dec 2019 04:23 AM IST
आसिम खान सर्वेश कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

भतीजे महबूब के शव की शिनाख्त होते ही हाकिम बिलख इस तरह पड़े कि उन्हें हौसला देने वाले भी भावुक हो उठे। गांव से अपने लाडले की खैरियत पूछने के लिए आए फोन पर हाकिम रोते हुए बस यही कहते रहे, महबूब अब नहीं रहा। फिल्मिस्तान में  मौत के तांडव के बाद हर तरफ मातम का माहौल था। रिक्शा चलाकर परिवार का गुजारा करने वाले हाकिम भी इस बात से अंजान थे कि महज छह महीने पहले दिल्ली पहुंचे उनके भतीजे का यह अंतिम सफर होगा। 

विज्ञापन


हाकिम ने कहा कि वह अपने गांव के कुछ लेागों के साथ रहता था। बीच बीच में मुलाकात भी होती थी, लेकिन अब तो भतीजा ही नहीं रहा। 13 वर्षीय महबूब के पड़ोस के गांव के युवक अरमान ने बताया कि वह लंच बॉक्स तैयार करने वाली फैक्टरी में काम करता था। कई बार खुद के लिए लंच बॉक्स भी पैक कर लेता था ताकि काम करते वक्त भूख लगने पर खाना खा सके।

मृतकों में हैं कई नाबालिग

बिहार के समस्तीपुर के गांव ब्रह्मपुरा निवासी महबूब सहित आसपास के गांवों के सहमत, मुस्तफा सहित कुछ और नाबालिग लापता हैं। फैक्टरियों में रहकर काम करने वाले अधिकतर नाबालिगों के साथ परिवार के अन्य सदस्य भी नहीं रहते थे। 

नतीजतन, अधिकतर मृतकों की पहचान की तलाश में बिहार के अलग-अलग जिलों के लोग सुबह से ही अस्पतालों में अपनों की तलाश में जुटे रहे। महबूब के गांव का ही छोटू उर्फ सहमत की खैरियत जानने के लिए भी रिश्तेदार और पड़ोसी इधर उधर भटकते रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक फैक्ट्री में काम करने वालों में बड़ों के साथ-साथ कई नाबालिग भी काम कर रहे थे।

शिनाख्त के लिए अस्पतालों के चक्कर काटते रहे परिजन

लेडी हार्डिंग अस्पताल में पहुंचे मो. अरमान ने बताया कि गांव से आए फोन पर इस घटना की जानकारी हासिल करने के लिए घटनास्थल पर भेजा गया। जिन अस्पतालों में घायलों और मृतकों को ले जाया गया, वहां जाकर अपनों की पहचान के लिए सुबह से भटक रहे हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें