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Delhi EV Policy: हर ईवी डीलरशिप पर छह माह में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य, उल्लंघन पर एक्शन

Sun, 12 Jul 2026 03:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा धनंजय मिश्रा, दिल्ली

सार

अब हर अधिकृत ईवी डीलरशिप को अधिसूचना जारी होने के छह महीने के भीतर सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना अनिवार्य होगा। तय समय में यह व्यवस्था नहीं करने वाले डीलरों के खिलाफ परिवहन विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।
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सांकेतिक चित्र - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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दिल्ली सरकार ने नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति के तहत राजधानी में चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब हर अधिकृत ईवी डीलरशिप को अधिसूचना जारी होने के छह महीने के भीतर सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना अनिवार्य होगा। तय समय में यह व्यवस्था नहीं करने वाले डीलरों के खिलाफ परिवहन विभाग सख्त कार्रवाई करेगा। ऐसे डीलरों को विभाग के निर्धारित पोर्टल से डी-एक्टिवेट किया जा सकता है, जिससे उनके माध्यम से सब्सिडी संबंधी प्रक्रिया प्रभावित होगी।

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परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य ईवी उपयोगकर्ताओं की ''रेंज एंग्जायटी'' यानी बैटरी खत्म होने की चिंता को कम करना और राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार बढ़ाना है। विभाग ने सभी अधिकृत डीलरों को चार्जिंग ढांचा विकसित करने के लिए छह महीने की समयसीमा दी है। दिशानिर्देशों के अनुसार यदि कोई डीलर तय अवधि में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित नहीं करता है तो उसे विभाग के पोर्टल से हटा दिया जाएगा। इसका सीधा असर नई ईवी की बिक्री और सब्सिडी से जुड़ी प्रक्रियाओं पर पड़ेगा। जब तक डीलर नियमों का पालन नहीं करेगा, तब तक वह सब्सिडी के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे डीलरों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

शोरूम के बाहर या परिसर में होगा चार्जिंग स्टेशन
नई नीति के तहत हर अधिकृत ईवी शोरूम के बाहर या परिसर में ऐसा चार्जिंग स्टेशन विकसित करना होगा, जहां आम लोग भी अपने वाहन चार्ज कर सकें। दोपहिया और तिपहिया वाहनों की डीलरशिप पर कम से कम तीन सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट तथा चारपहिया वाहनों की डीलरशिप पर कम से कम दो चार्जिंग पॉइंट स्थापित करना अनिवार्य होगा। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये स्टेशन किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं होंगे। किसी भी ब्रांड का इलेक्ट्रिक वाहन चालक यहां चार्जिंग सुविधा का उपयोग कर सकेगा। इस पूरे नेटवर्क के विकास के लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल) को राज्य की नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो बिजली वितरण कंपनियों के साथ मिलकर कार्ययोजना तैयार करेगी।
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इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों को मिलेगी नो-एंट्री से राहत
सरकार ने व्यापारियों को इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहन अपनाने के लिए विशेष राहत देने का भी फैसला किया है। 3.5 टन से अधिक और 12 टन तक सकल भार वाले इलेक्ट्रिक एन-2 श्रेणी के मालवाहक वाहनों को नो-एंट्री प्रतिबंधों से छूट दी जाएगी। शुरुआती चरण में ऐसे एक हजार वाहनों को यह सुविधा मिलेगी। इनकी पहचान विशेष रजिस्ट्रेशन सीरीज के माध्यम से की जाएगी।

ईवी खरीदारों के लिए जानने योग्य चार अहम नियम

  • वाहन का रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र (आरसी) जारी होने के 30 दिनों के भीतर सब्सिडी के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा
  • आवेदन का सत्यापन होने के बाद 60 दिनों के भीतर सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी
  • अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर पर पुराना वाहन कबाड़ कर छह महीने के भीतर नई ईवी खरीदने पर अतिरिक्त स्क्रैपिंग इंसेंटिव मिलेगा
  • सब्सिडी पाने वाले वाहन को तीन वर्ष तक दिल्ली से बाहर ट्रांसफर या दोबारा रजिस्ट्रेशन (एनओसी) नहीं कराया जा सकेगा

नई ईवी नीति लागू करने से पहले सरकार को चार्जिंग नेटवर्क से जुड़ी व्यवस्थाएं करनी चाहिए थी
दिल्ली के पूर्व परिवहन उपायुक्त डॉ. अनिल छिकारा का कहना है कि नई ईवी नीति लागू करने से पहले सरकार को चार्जिंग नेटवर्क से जुड़ी स्पष्ट व्यवस्था तैयार करनी चाहिए थी। डीलरों के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन कई शोरूम के पास इसके लिए पर्याप्त जगह ही उपलब्ध नहीं है। मेरी राय में परिवहन विभाग को पहले बिजली वितरण कंपनियों के साथ मिलकर निजी चार्जिंग स्टेशनों के नियम, ग्रीन मीटर की व्यवस्था, सुरक्षा मानक, बिजली दरों की श्रेणी, एकीकृत सॉफ्टवेयर और सभी वाहनों के लिए समान चार्जिंग कनेक्टर जैसी व्यवस्थाएं तय करनी चाहिए थीं। यदि चार्जिंग स्टेशनों पर जगह की कमी, लंबी प्रतीक्षा या सुरक्षा संबंधी समस्याएं सामने आती हैं तो इसका नकारात्मक असर केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी ईवी अपनाने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
-दिल्ली के पूर्व परिवहन उपायुक्त डॉ. अनिल छिकारा

ईवी चार्जिंग नेटवर्क का बदलेगा मॉडल, फास्ट चार्जिंग पर होगा फोकस

दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के बढ़ते उपयोग को देखते हुए सरकार ने चार्जिंग नेटवर्क का मॉडल बदलने की तैयारी शुरू कर दी है। अब केवल चार्जिंग प्वाॅइंट की संख्या बढ़ाने के बजाय फास्ट चार्जिंग सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जाएगा। योजना के तहत अगले चार वर्षों में करीब 32 हजार सार्वजनिक चार्जिंग प्वाॅइंट विकसित किए जाएंगे, जबकि मौजूदा स्लो चार्जिंग स्टेशनों को चरणबद्ध तरीके से फास्ट चार्जिंग स्टेशनों में अपग्रेड किया जाएगा।

हाल में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में स्पष्ट किया गया कि चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार केवल स्थान चिह्नित करने तक सीमित नहीं रहेगा। इसके साथ निर्बाध बिजली आपूर्ति और मजबूत विद्युत ढांचे का विकास भी प्राथमिकता होगी। अधिकारियों को सौर ऊर्जा आधारित चार्जिंग स्टेशनों को बढ़ावा देने तथा ऐसे मल्टी-व्हीकल चार्जिंग हब विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां दोपहिया, तिपहिया, कार समेत सभी प्रकार के इलेक्ट्रिक वाहन आसानी से चार्ज हो सकें।

सरकार की योजना के अनुसार मेट्रो स्टेशनों की पार्किंग, रेलवे स्टेशनों के बाहर, नगर निगम की पार्किंग, एलिवेटेड मेट्रो कॉरिडोर के नीचे उपलब्ध स्थान, डीडीए मार्केट, बड़े शॉपिंग मॉल, सरकारी परिसरों और प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों को प्राथमिकता के आधार पर फास्ट चार्जिंग सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। इसके लिए विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय कर उपलब्ध भूमि और मौजूदा बुनियादी ढांचे का अधिकतम उपयोग किया जाएगा।

चरणबद्ध तरीके से चार्जिंग स्टेशन होंगे अपग्रेड
नई योजना के तहत मौजूदा स्लो चार्जिंग स्टेशनों को चरणबद्ध तरीके से फास्ट चार्जिंग स्टेशनों में बदला जाएगा। इससे सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी और कम समय में अधिक वाहन चार्ज किए जा सकेंगे। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक नेटवर्क में फास्ट चार्जिंग की हिस्सेदारी बढ़ने से ईवी चालकों का इंतजार काफी कम होगा। जहां सामान्य एसी चार्जर से वाहन चार्ज होने में कई घंटे लगते हैं, वहीं डीसी फास्ट चार्जर से कई आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहन 20 से 80 प्रतिशत तक केवल 20 से 60 मिनट में चार्ज हो सकते हैं। इससे टैक्सी, कैब, डिलीवरी और अन्य व्यावसायिक ईवी का संचालन अधिक सुगम होगा। हालांकि इसके लिए उच्च क्षमता वाली बिजली आपूर्ति, मजबूत ग्रिड और पर्याप्त बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी।

फास्ट चार्जिंग से होंगे ये बड़े फायदे
  • सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों पर प्रतीक्षा का समय घटेगा
  • कम समय में अधिक वाहन चार्ज हो सकेंगे
  • टैक्सी, डिलीवरी और अन्य व्यावसायिक ईवी का संचालन आसान होगा
  • इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार और तेज होगी

 
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अनिवार्य ईवी नीति के विरोध में उतरा ट्रांसपोर्ट मंच

दिल्ली सरकार की प्रस्तावित अनिवार्य इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति का दिल्ली एनसीआर ट्रांसपोर्ट एकता मंच ने विरोध किया है। मंच ने उपराज्यपाल को पत्र भेजकर नीति पर दोबारा विचार करने और इसे लागू करने से पहले सभी पक्षों से बातचीत करने की मांग की है। 

मंच के महासचिव श्याम सुंदर ने पत्र में कहा है कि संगठन प्रदूषण कम करने और नई तकनीक को अपनाने के पक्ष में है, लेकिन बिना पर्याप्त तैयारी के ईवी को अनिवार्य करना लाखों वाहन चालकों और छोटे कारोबारियों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

पत्र के अनुसार, साल 1998 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बड़ी संख्या में वाहन मालिकों ने आर्थिक बोझ उठाकर अपने वाहनों को सीएनजी में बदला था। मौजूदा समय में सीएनजी के लिए पूरा नेटवर्क उपलब्ध है। ऐसे में ऑटो, टैक्सी, टेम्पो, ट्रक और बस चालकों को अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार सीएनजी और ईवी में से विकल्प चुनने की सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि ईवी नीति लागू करने से पहले सभी ट्रांसपोर्ट संगठनों और संबंधित लोगों के साथ बातचीत की जाए। 
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