उच्च न्यायालय ने इंजीनियरिंग छात्र को राहत प्रदान करते हुए उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी खारिज कर दी। आरोपी के पास से दिल्ली एयर पोर्ट पर अहमदाबाद जाते समय 20 कारतूस बरामद हुए थे।
न्यायमूर्ति विभु बखरू ने फैसला में कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि याची को ऐसी जानकारी थी कि उसके बैग में कारतूस है। घटना के समय पर एयरफोर्स में नौकरी के लिए साक्षात्कार देने जा रहा था। अदालत ने उसके इस तर्क को स्वीकार कर लिया कि अहमदाबाद जाने के लिए उसने अपने मकान मालिक की पत्नी से बैग लिया था और मकान मालिक के पास आर्मस लाईसेंस है। ऐसे में उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि बैग में कारतूस रखे हुए हैं।
याची ने तर्क रखा कि एयरपोर्ट जाने की जल्दी में उसने बैग को अच्छी तरीके से नहीं देखा था और बैग लेकर उसी में कपड़े रखकर एयरपोर्ट चला गया। न्यायमूर्ति बाखरू ने सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कारतूस की जानकारी न होने पर आर्म्स एक्ट का मामला नहीं बनता।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा पुलिस ने भी अपनी जांच में याची के तर्को पर किसी भी प्रकार की असहमति नहीं जताई है। ऐसे में याची के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को खारिज किया जाता है।