केंद्रीय बजट का दिल्ली विधानसभा चुनाव से बेशक कोई सीधा ताल्लुक नहीं है, लेकिन चुनावी मझधार में मतदान से चार दिन पहले आए बजट के सियासी मायने काफी अहम हैं। खासतौर से आयकर का स्लैब 12 लाख करने का असर मध्य वर्ग पर पड़ेगा। वहीं, युवाओं, बुजुर्गों समेत अस्थायी तौर से अनुबंध पर काम करने वाले गिग वर्कर्स और रेहड़ी-पटरी के कामगारों को भी बजट से राहत मिली है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इस बजट का असर आखिरी समय में पार्टी विशेष को अपना वोट देने का मन बनाने वाले मतदाताओं पर पड़ेगा। बजटीय प्रावधानों का असर फ्लोटिंग वोटर पर पड़ सकता है। कैडर वोट के इससे ज्यादा प्रभावित होने की उम्मीद नहीं है।
दिल्ली में मध्य वर्ग
अलग-अलग एजेंसियों के सर्वे बताते हैं कि दिल्ली की आबादी का करीब 67 फीसदी मध्य वर्ग से है। वहीं, 73 फीसदी लोग प्राइवेट नौकरी करते हैं। दूसरी तरफ यहां की प्रति व्यक्ति आय 4.61 लाख रुपये है। वहीं, रेहड़ी-पटरी और गिग वर्कर्स की संख्या का कोई अधिकृत आंकड़ा नहीं है। फिर भी, दिल्ली में इनकी बड़ी आबादी निवास करती है। निचले तबके से ताल्लुक रखने वाले इस तबके का वोट भी चुनावों पर असर डालता है।
बिहार से जुड़े वोटर भी हो सकते हैं प्रभावित
विशेषज्ञ बताते हैं कि बजट में बिहार के लिए जो पांच बड़ी घोषणाएं की गई हैं, उनका असर दिल्ली में रहने वाले उन वोटर पर पड़ सकता है, जिनका ताल्लुक बिहार से है। इसमें वे वोटर अहम होंगे, जिनका बीते वर्षों में दिल्ली आना हुआ है। वे खुद दिल्ली में रहते हैं, जबकि उनका परिवार बिहार में है।