दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत का सूखा खत्म करने के लिए भाजपा हर संभव दांव आजमा रही है। राज्य के 3.5 लाख तेलुगुभाषी मतदाताओं को रिझाने के लिए पार्टी जहां अपनी सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी और जनसेना पार्टी की शरण में है, वहीं राज्य की 70 सीटों की जिम्मेदारी 35 दिग्गज नेताओं को दी है।
इन नेताओं को हर बूथ पर पार्टी के पक्ष में 50 फीसदी वोट कराने के साथ हर सीट पर 20,000 वोट बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके इतर बिहार और उत्तर प्रदेश के उन नेताओं को मोर्चे पर लगाया गया है, जिनके क्षेत्र के लोग राजधानी दिल्ली में मतदाता हैं।
पार्टी की चुनाव रणनीति से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने बताया, तेलुगुभाषी मतदाताओं को साधने के लिए राजधानी में टीडीपी और जेएसपी के करीब पांच दर्जन नेता एक सप्ताह से राजधानी में डेरा डाले हुए हैं। इनमें कई मंत्री और विधायक शामिल हैं। ये नेता तेलुगु मतदाताओं से सीधा संपर्क कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक संगठन की कमान संभालने वाले और वर्तमान में केंद्रीय संगठन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक हमारी मुख्य चुनौती भाजपा और आप के बीच के करीब 15% वोट अंतर को पाटना और लोकसभा में मिले समर्थन को विधानसभा चुनाव में बरकरार रखना है।
पार्टी को लोकसभा के बीते दो चुनाव में 50% से अधिक मत मिले हैं, मगर विधानसभा में मत 32 से 38 फीसदी के आसपास रहता है। इसके उलट आप को विधानसभा चुनाव में 50% से अधिक मत मिला है।