दिल्ली चुनाव का बिगुल: आप, भाजपा, कांग्रेस की नई चुनौती
छोटी सी दिल्ली, 70 विधानसभा सीटों वाली, केन्द्र शासित, लेकिन राजनीति में पूरे देश में दबदबा रखती है। कारण साफ है। सात लोकसभा सीटों वाली देश की राजधानी दिल्ली में देश के करीब-करीब हर राज्य के लोग मतदाता बनकर रहते हैं। कई राज्यों के मतदाताओं जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल के लोगों की अच्छी खासी तादाद है। इसलिए दिल्ली की राजनीतिक हवा कई राज्यों की राजनीति को प्रभावित करती है। इसकी अहमियत 2015 में काफी बढ़ गई क्योंकि केंद्र में देश की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूर्ण बहुमत देकर भेजा।
दिल्ली की जनता ने भी सात सीटें भाजपा को दे दी, लेकिन विधानसभा चुनाव में जहां कांग्रेस खाता नहीं खोल पाई, वहीं हाई टैम्पो प्रचार अभियान के बाद भी भाजपा के केवल तीन विधायक चुनाव जीत सके। अरविन्द केजरीवाल को दिल्ली की जनता ने 67 सीटें (95.71 प्रतिशत) देकर विधानसभा में भेज दिया। मई 2014 में पूर्ण बहुमत लेकर आए प्रधानमंत्री के चेहरे के लिए यह पहला बड़ा झटका था।
आम आदमी पार्टी के प्रभारी संजय सिंह बड़ी ठसक से कहते हैं कि हमारे पास दिल्ली में गिनाने के लिए सरकार का काम है। भाजपा के पास क्या है? मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद कहते हैं कि दिल्ली में दो सरकार है। केंद्र की सरकार प्रधानमंत्री मोदी चला रहे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री वह खुद हैं। दोनों की तुलना कर लीजिए।
आम आदमी पार्टी के लिए प्रचार की रणनीति में जुटे राजेश चौधरी कहते हैं कि दिल्ली की जनता को मुफ्त पानी, बिजली, मोहल्ला क्लीनिक का सीधा लाभ मिल रहा है। कालोनियों में सड़के, सीवर, पानी की पाइप लाइन का काम हुआ है। इसे हमें बताने की जरूरत नहीं है। इसे दिल्ली की जनता खुद देख रही है। महसूस कर रही है। दिल्ली के पार्को में सुबह लोग रोजाना व्यायाम करके दवा से मुक्ति पा रहे हैं। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया खुद कहते हैं आम आदमी पार्टी ने पांच साल में जो किया है, जनता के सामने हैं। हमने जनता के पैसे का जनता के लिए सदुपयोग किया है।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम से आम आदमी पार्टी, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर हमला बोला था। अमित शाह ने आज फिर अरविंद केजरीवाल सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है। भाजपा नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) पर अल्पसंख्यकों को भ्रमित करने, भड़काने और दंगा कराने का आरोप भी आम आदमी पार्टी तथा कांग्रेस पर लगा रही है। इसी के साथ रविवार से ही भाजपा ने दिल्ली के हर घर का दरवाजा खटखटाने, दोनों दलों के झूठ का पर्दाफाश करने, केंद्र सरकार के कामकाज को गिनाने का अभियान शुरू किया है। यह भी एक इत्तेफाक है कि पिछले महीने दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय कैंपस में अराजक तत्वों से निबटने के नाम पर पुलिस घुसी थी।