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Delhi Election Result: आप सरकार के कौन से मंत्री बचा ले गए साख और कौन हारे? यहां देखें सबका रिपोर्ट कार्ड

Sat, 08 Feb 2025 05:46 PM IST
आकाश दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भाजपा ने आम आदमी पार्टी को दिल्ली में जीत का चौका लगाने से रोक दिया। अब तक के परिणाम में भाजपा बहुमत का आंकड़ा पार कर गई है। यहां 27 साल बाद भाजपा ने सत्ता में वापसी की है। 27 साल पहले भाजपा की सुषमा स्वराज 52 दिन के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री रही थीं।
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Delhi Election 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के कई नेता इतिहास रचने और अपने पुराने रिकॉर्ड को मजबूत करने की कोशिश में जुटे थे। इस रेस में आतिशी कैबिनेट के पांच मंत्री भी शामिल थे। इनमें चार मंत्रियों ने जीत का स्वाद चखा है, लेकिन ग्रेटर कैलाश सीट से चौथी बार चुनाव मैदान में उतरे सौरभ भारद्वाज को हार का सामना करना पड़ा है। आइए जानते हैं आतिशी कैबिनेट के मंत्रियों की सीटों का हाल और समझते हैं सौरभ भारद्वाज की हार की अहम वजह क्या रही?

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दिल्ली में आम आदमी पार्टी की पहली बार साल 2013 में बनी सरकार में सौरभ भारद्वाज मंत्री बने थे। हालांकि दूसरी सरकार में उन्हें जगह नहीं मिली। सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया के जेल जाने के बाद केजरीवाल ने उन पर भरोसा जताते हुए फिर से एक बार मंत्री बनाया था। पार्टी का उन पर यकीन कायम रहा। सौरभ भारद्वाज 9 मार्च 2023 से दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष और स्वास्थ्य, शहरी विकास और जल मंत्री थे। 

'आप' में सौरभ भारद्वाज का सियासी सफर

2013: आप के सौरभ भारद्वाज को मिली जीत 
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। 2013 के इस चुनाव में ग्रेटर कैलाश सीट पर सौरभ भारद्वाज को जीत मिली। उन्होंने 43097 वोट हासिल किए। उन्होंने भाजपा के अजय कुमार मल्होत्रा को 13092 वोट से हरा दिया था। अजय कुमार को 30005 वोट मिले थे।  

2015: सौरभ भारद्वाज एक बार फिर जीते 
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। ग्रेटर कैलाश सीट पर 2015 में मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। आप ने यहां से सौरभ भारद्वाज को मैदान में उतारा। उन्हें 57589 वोट मिले। सौरभ भारद्वाज ने भाजपा के राकेश कुमार गुल्लैया को 14583 वोट से हरा दिया। भाजपा के राकेश कुमार गुल्लैया को 43006 वोट मिले थे।

2020 में सौरभ भारद्वाज ने लगाई जीत की हैट्रिक
2020 के विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। ग्रेटर कैलाश के नतीजों की बात करें तो यहां से आप की तरफ से सौरभ भारद्वाज को जीत मिली। आप नेता ने भाजपा के शिखा रॉय को 16,809 वोट से पटखनी दी थी। आप को 60372 वोट जबकि दूसरे नंबर पर रही भाजपा को 43563 वोट मिले। 

2025 में सौरभ भारद्वाज जीत की हैट्रिक लगाने से चूके
2025 में भी सौरभ भारद्वाज ग्रेटर कैलाश सीट से चुनाव लड़े। उनके सामने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शिखा रॉय और कांग्रेस से गर्वित सिंघवी थे। भाजपा प्रत्याशी ने शिखा रॉय ने 3188 वोटों के अंतर से सौरभ भारद्वाज को मात दी है। सौरभ भारद्वाज को कुल 46406 वोट मिले हैं। 

जानें सौरभ भारद्वाज की हार की बड़ी वजह
इस बार के दिल्ली विधानसभा चुनाव में सत्ता विरोधी लहर भी आप की हार की बड़ी वजह रही। नतीजतन आम आदमी पार्टी के कई बड़े दिग्गज नेता जैसे पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को हार का सामना करना पड़ा। इसी कतार में सौरभ भारद्वाज भी नजर आए। वह ग्रेटर कैलाश सीट से लगातार चौथी बार चुनाव मैदान में थे। यहां भी बदलाव की लहर दिखी। इसके अलावा सौरभ भारद्वाज को मंत्री पद की जिम्मेदारी तब मिली जब कई विभाग संभालने वाले दो मंत्रियों की गिरफ्तारी हुई। मार्च 2023 में आम आदमी पार्टी की सरकार ने कैबिनेट विस्तार किया था। जिसमें सौरभ भारद्वाज को स्वास्थ्य मंत्री पद की जिम्मेदारी थमाई गई। ऐसे में बतौर मंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल दो साल से भी कम रहा। मंत्री के तौर पर वह कोई नई लकीर खींचने में भी कामयाब नहीं रहे।

यहां जानें अन्य मंत्रियों की सीटों का हाल

कालकाजी विधानसभा सीट
कालकाजी सीट से आप प्रत्याशी आतिशी चुनाव जीत गई हैं। उन्होंने 3521 वोटों के अंतर से भाजपा प्रत्याशी रमेश बिधूड़ी को हराया है। बता दें कि कालकाजी सीट सबसे चर्चित सीटों में शामिल है। इस बार आम आदमी पार्टी ने कालकाजी सीट से मुख्यमंत्री आतिशी को टिकट दिया था। वहीं कांग्रेस ने पूर्व विधायक अलका लांबा को उतारा था। इन चेहरों के कारण कालकाजी सीट एक बार फिर हॉट सीट बन गई। वहीं भाजपा ने यहां से रमेश बिधूड़ी को टिकट दिया था। कालका सीट से उम्मीदवार बनाए गए बिधूड़ी अपने बयानों की वजह से विवादों में रहते हैं। 

बल्लीमारान विधानसभा सीट
दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री इमरान हुसैन ने बल्लीमारान सीट से जीत दर्ज की हैं। उन्होंने 29823 वोटों के अंतर से भाजपा के प्रत्याशी कमल बागड़ी को हराया है। इमरान हुसैन के सरकार के मंत्री होने के चलते यह सीट भी हॉट सीट बनी हुई थी। कांग्रेस की तरफ से हारून यूसुफ चुनावी मैदान में थे। हारून यूसुफ भी दिल्ली सरकार में पहले मंत्री रह चुके हैं। इसलिए इस सीट के रिजल्ट पर हर किसी की नजर थी।

बाबरपुर विधानसभा सीट
बाबरपुर विधानसभा सीट से आप के प्रत्याशी गोपाल राय जीत गए हैं। उन्होंने 18994 वोटों के अंतर से भाजपा के प्रत्याशी अनिल वशिष्ठ को हराया है। गोपाल राय पिछले 10 साल से केजरीवाल की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। जिसके चलते यह सीट काफी चर्चा में रही। इसलिए इस सीट के चुनाव परिणाम को लेकर भी लोगों में उत्सुकता देखने को मिली।
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सुल्तानपुर माजरा सीट
इस सीट से दिल्ली सरकार के मंत्री और आप प्रत्याशी मुकेश कुमार अहलावत ने जीत दर्ज की है। मुकेश के सामने भाजपा से करम सिंह थे और कांग्रेस ने जय किशन को चुनाव मैदान में उतारा था। मुकेश कुमार ने 17126 वोटों के अंतर से भाजपा के करम सिंह को हराया। मुकेश कुमार अहलावत ने कुल 58767 वोट हासिल किए हैं। 
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