केजरीवाल का जाट-प्रेम केवल घड़ियाली आंसू हैं: बिधूड़ी
भाजपा सांसद व गुजर नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी ने अरविंद केजरीवाल के एकाएक उमड़े ‘जाट-प्रेम’को चुनावी सागर में घड़ियाली आंसू करार दिया है। कहा कि केजरीवाल को यह शायद मालूम नहीं है कि दिल्ली में जाटों को आरक्षण 1993 में बनी भाजपा सरकार ने ही दिया था। दिल्ली देहात की लगातार उपेक्षा के कारण गांवों में जाटों समेत सभी जातियों के लोग उनसे दूरी बना लिए है।
'दिल्ली में जाटों को आरक्षण भाजपा सरकार ने ही दिया था'
बिधूड़ी ने कहा कि 1993 में जब दिल्ली में भाजपा सरकार बनी थी तो वे खुद भी जाट समाज के आग्रह पर विधायक के रूप में सरकार से अनुरोध किए की जाटों को ओबीसी में शामिल किया जाना चाहिए और इसके बाद भाजपा सरकार ने यह फैसला लिया था। उन्होंने कहा कि केजरीवाल बताएं कि आखिर पिछले दस सालों में कितने जाट युवकों को सरकारी नौकरी उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई। दिल्ली में जाटों के करीब 200 गांव हैं, जहां अधिकतर लोग खेती पर ही निर्भर हैं लेकिन दिल्ली के किसानों के साथ केजरीवाल ने जो सौतेला व्यवहार किया है, वह किसी से छिपा नहीं है।
इन गांवों के किसान ही केजरीवाल से यह पूछना चाहते हैं कि उन्होंने केंद्र में मोदी की सरकार के किसान कल्याणकारी योजनाओं को दिल्ली में लागू क्यों नहीं होने दिया? उन्होंने किसानों को सस्ती दरों पर खेती के लिए बिजली उपलब्ध क्यों नहीं कराई जबकि हरियाणा के किसानों को यह सुविधा मिलती है? दिल्ली के किसानों से बिजली के कॉमर्शियल रेट वसूल किए जाते हैं। ट्रैक्टर को कॉमर्शियल वाहन घोषित क्यों किया?दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा दिल्ली में किसानों के सर्वप्रिय नेता रहे हैं और केजरीवाल से बार-बार अनुरोध किया गया कि किसी संस्थान का नाम उनके नाम पर करें लेकिन उन्होंने ऐसा करना उचित नहीं समझा।