दिल्ली की इस सीट पर भाजपा का खाता नहीं खुला है। आप तीन और कांग्रेस ने चार बार जीत दर्ज की। सिसोदिया के उतरने से मुकाबला रोचक हो गया है। भाजपा की घोषणा का इंतजार है।
दिल्ली की जंगपुरा विधानसभा क्षेत्र में अभी तक भाजपा का जीत के मामले में खाता नहीं खुला है। जंगपुरा में कांग्रेस ने अपनी पकड़ लंबे समय तक बनाए रखी। पहले चार चुनावों में लगातार कांग्रेस को जीत मिली। वर्ष 2013 के बाद राजनीतिक समीकरण बदले और लगातार तीन बार से आम आदमी पार्टी का यहां कब्जा है।
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भाजपा इस क्षेत्र में छह बार दूसरे व एक बार तीसरे स्थान पर रही थी। यह सीट सिख, मुस्लिम और हिंदू मतदाताओं के अद्वितीय मिश्रण के कारण राजनीतिक दलों के लिए हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है। चौथी बार जीत की तलाश में आप ने इस बार बड़ा कदम उठाया है।
पार्टी ने पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया को इस क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतारकर मुकाबले को रोमांचक बना दिया है। वहीं, कांग्रेस ने अपनी पुरानी ताकत को फिर से सक्रिय करने की कोशिश की है। पार्टी ने ताजदार बाबर के बेटे व पूर्व मेयर फरहाद सूरी को उम्मीदवार बनाया है।
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कांग्रेस की रणनीति सिख और मुस्लिम बहुल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ हिंदू मतदाताओं को भी आकर्षित करने की है। भाजपा ने भले ही अब तक अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन इस बार पार्टी के भीतर बड़े नामों को लेकर चर्चा तेज है।
भाजपा के लिए यह क्षेत्र राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है। पार्टी को उम्मीद है कि क्षेत्रीय विकास और केंद्र सरकार की नीतियों को आधार बनाकर वे मतदाताओं को अपनी ओर खींच सकते हैं। लिहाजा, जंगपुरा में इस बार का चुनाव केवल जीत-हार की लड़ाई नहीं, बल्कि दिल्ली की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश देगा।
भाजपा के लिए यह क्षेत्र राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है। पार्टी को उम्मीद है कि क्षेत्रीय विकास और केंद्र सरकार की नीतियों को आधार बनाकर वे मतदाताओं को अपनी ओर खींच सकते हैं। लिहाजा, जंगपुरा में इस बार का चुनाव केवल जीत-हार की लड़ाई नहीं, बल्कि दिल्ली की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश देगा।
नए राशन कार्ड नहीं बन रहे हैं और पुराने में नए सदस्य का नाम नहीं जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा खासतौर पर झुग्गी बस्तियों में जनसुविधाओं के अभाव के साथ-साथ बुरी हालत है। - राजेश शास्त्री
गांव वालों को सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिला है। एक ओर वह कृषि भूमि का म्यूटेशन नहीं करा पा रहे हैं। वहीं, कृषि भूमि में फसल उजाड़ी जा रही है। इस कारण ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है। - सतीश चौहान
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं हैं। इलाके के निवासियों को दूरदराज तक सुविधाओं के लिए जाना पड़ता है। इलाके में पार्क, समुदाय घर आदि सुविधाओं की भी कमी है। इस कारण निवासी परेशान रहते हैं। - जयकिशन
पेयजल संकट के कारण लोग परेशान हैं। पर्याप्त पानी नहीं आता है। दूसरी तरफ जब भी पानी आता है तो दूषित आता है। इस कारण लोग पेयजल के लिए इधर-उधर भटकते रहते है। - मनोज कुमार