केजरीवाल दूसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे। इस बार उनके पास 67 सीटें थी। उन्हें भरोसा था कि पांच साल तक उनकी सरकार को कोई हिला नहीं सकता। हालांकि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनकी पत्नी करीब एक साल तक नौकरी करती रही। बाद में जब उन्हें लगा कि अब सरकारी नौकरी आगे नहीं चल सकती तो उन्होंने नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया। उसके बाद भी वे सार्वजनिक तौर पर कहीं भी नजर नहीं आई। जब अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्री एलजी आवास पर धरना देने लगे तो सुनीता सक्रिय रही।
केजरीवाल के आवास पर ममता बैनर्जी और चंद्रबाबू नायडू सरीखे नेता पहुंचे। उनसे सुनीता केजरीवाल ने ही बातचीत की। उसके बाद वे धीरे धीरे पार्टी की अंदरुनी गतिविधियों में सक्रियता दिखाने लगी। राज्यसभा चुनाव से पहले भी उनका नाम उछाला गया कि केजरीवाल उन्हें उम्मीदवार बना सकते हैं।
हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। अब वही सुनीता अपने बच्चों को साथ लेकर नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में पति केजरीवाल के लिए वोट मांग रही हैं। पिछले दो दिन से वे नई दिल्ली में डोर टू डोर कैंपेन कर रही हैं। उन्होंने अंसारी नगर, तिलक मार्ग एवं आसपास के कई इलाकों में घर-घर जाकर केजरीवाल सरकार का रिपोर्ट कार्ड वोटरों को बांटा और उनसे आम आदमी पार्टी को वोट देने की अपील की।