दिल्ली के इस विधानसभा चुनाव में भी पिछले विधानसभा की तर्ज पर काफी कुछ अद्भुत हो रहा है। देश के कई बड़े नेताओं की राजनैतिक दिशा आज आ रहे परिणामों से तय होगी। राजनीति में सीधे भाजपा के मुख्यमंत्री प्रत्याशी के रूप में एंट्री करने वाली पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी का राजनैतिक भविष्य आज तय होगा तो मोदी फीवर मतदाताओं पर और चढ़ा या उतर गया यह दिल्ली के थर्मामीटर से जानने के लिए पूरे देश खासकर विपक्षी दलों की नजरें गढ़ी हुई हैं।
49 दिन में सरकार छोड़कर बड़ा दांव खेलने वाले केजरीवाल की आगे की दिशा भी आज पता लगेगी। दिल्ली चुनाव परिणाम अगर उत्साहित करते हैं तो ही आप उत्तर प्रदेश, बिहार व पंजाब के विधानसभा चुनावों में अपनी भूमिका के बारे में सोचेगी। कांग्रेस का दिल्ली चुनाव में चेहरा रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन के नेतृत्व में चुनाव लड़ी कांग्रेस अगर एग्जिट पोल के अनुमान के अनुसार झटका खायी है तो उसे दोबारा खड़े होने में सालों लग जाएंगे।
किरण को सीएम दावेदार बनाने का पार्टी में ही हो रहा है विरोध
सबसे महत्वपूर्ण इस परिणाम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर को नापना रहेगा। लोकसभा चुनाव के बाद कई राज्यों में मोदी के नाम पर विजय पताका लहरा चुकी भाजपा की दिल्ली चुनाव परिणाम में अगिभन परीक्षा होगी। राजनैतिक पंडितों का मानना है कि मात्र आठ माह बाद मोदी के नाम का चढ़ा बुखार लोगों पर अगर केजरीवाल कम करने में सफल होते हैं तो गैर भाजपाई दल आगामी चुनाव में एकजुट होकर और मजबूती से भाजपा के खिलाफ जुट जाएंगे।
भले ही भाजपा ने मतदान से कुछ दिन पहले किरण बेदी को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट कर दिया लेकिन वोट मोदी के नाम पर ही मांगा। यही वजह रही कि टीएमसी, सीपीआई व जद यू दिल्ली चुनाव में मतदान से पूर्व आप को समर्थन देकर राजनैतिक पासा फेंक चुकी है। विस चुनाव में ऑनलाइन रहने वाले सीएम प्रत्याशी हर समय अपनी बात लोगों तक पहुंचाते रहे।
दिल्ली में यह पहली बार हुआ है
अरविंद केजरीवाल सहयोगी के जरिये लैपटॉप से लगातार ट्वीट करते रहे तो किरण व कांग्रेस के अजय माकन आईपैड के माध्यम से लोगों से जुड़े रहे। बयान व जवाब देने को भी वह हमेशा ऑनलाइन दिखे। दिल्ली में यह भी पहली बार हुआ है कि मुख्य मुकाबले से कांग्रेस चुनाव से पहले ही बाहर मानी जा रही है। यह भी पहली बार है एग्जिट पोल में कांग्रेस या भाजपा नहीं बल्कि किसी तीसरे दल यानी आप को बढ़त बताई जा रही है।
पहली बार पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मुकाबले में प्रधानमंत्री का चेहरा रखा गया, ऐसा भी पहली बार ही हुआ कि केंद्र सरकार के मंत्रियों, सांसदों की लंबी फौज व स्वयं प्रधानमंत्री ने चुनाव में सीधे तौर पर जुड़े रहे और प्रचार किया। भाजपा शासित क्षेत्रों के सभी मुख्यमंत्री भी इस चुनाव में प्रचार करते दिखे। रेडियो को बड़े पैमाने पर प्रचार माध्यम बनाने, रोड शो व रैलियों की भरमार सहित कई मायनों में इस बार यह चुनाव अलग रहा।