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भाजपा 10 और कांग्रेस आठ सीटों पर नहीं खोल सकी खाता

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दिल्ली विधानसभा चुनाव एक बार जीत हासिल करने के साथ गत चुनाव में सीट जीतने के मामले में पहले स्थान पर रही भाजपा 10 सीटों पर जीत का श्रीगणेश नहीं कर पाई है। जबकि के लगातार तीन चुनाव जीतने वाली कांग्रेस भी अभी तक आठ सीटों पर अपना खाता खोलने के लिए संघर्षरत है।
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इनमें से एक सीट ऐसी है, जहां दिन रात एक करने के बावजूद कांग्रेस व भाजपा दोनों ही पार्टियों को जनता ने नकार रखा है। इस सीट पर एक ही नेता का कब्जा है, मगर वह नेता इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहा है।

राजधानी की मटिया महल सीट जिस पर कांग्रेस एवं भाजपा का कोई भी प्रत्याशी जीत हासिल नहीं सका है। यहां पर शोएब इकबाल का एकछत्र राज चल रहा है। वह चार दलों जनता दल, जनता दल एस, जनता दल यू व लोक जन शक्ति पार्टी के बैनर तले लगातार पांच बार चुनाव जीत चुके हैं। चुनाव में कांग्रेस एवं भाजपा उनके नजदीक भी पहुंच नहीं पाए हैं। मगर इस बार वह कांग्रेस में शामिल होकर उसके टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।
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क्या यही हैं कारण

कांग्रेस अभी तक भाजपा के गढ़ वाली शालीमार बाग, मोतीनगर, हरीनगर, जनकपुरी, कृष्णा नगर और करावल नगर सीट पर सेंध नहीं लगा पाई है। इसके अलावा वह बदरपुर सीट पर भी जीतने में भी कामयाब नहीं हुई है।

इस सीट पर भाजपा पहली बार पिछले चुनाव में ही जीती है। विस की 10 सीट ऐसी भी है जिन पर भाजपा को जीत इंतजार है। इन सीटों में से सुल्तानपुर माजरा, मंगोलपुरी, बल्लीमारान, जंगपुरा, अंबेडकर नगर एवं लक्ष्मी नगर (परिसीमन से पहले गीता कालोनी) में पिछले पांचों चुनाव में भाजपा जीत नहीं सकी है।

सीलमपुर विधान सभा क्षेत्र में चौधरी मतीन अहमद एक बार जनता दल, एक बार निर्दलीय और तीन बार कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल कर चुके हैं। उधर ‘आप’ ने अभी एक ही चुनाव लड़ा है, जिसमें उसने 28 सीटें जीती थीं।
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