आम आदमी पार्टी व भाजपा के बीच दिल्ली में माने जा रहे टफ मुकाबले में एक-एक वोट व सीट की मारामारी के बीच आप को नाम व चुनाव चिह्न की गफलत का नुकसान उठाना पड़ सकता है। करीब एक दर्जन सीटों पर एक दल के वरिष्ठ नेता ने इनमें से अधिकांश सीटों पर वही नाम या मिलते जुलते नाम वाले निर्दलीय उम्मीदवारों को तलाश कर उन्हें खड़ा किया है।
2013 के विधानसभा चुनाव में आप 19 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी। तब आप ने अपने झाडू से मिलते-जुलते चुनाव चिह्न टॉर्च, गाजर व ब्रश के कारण कम मार्जिन से कई सीटें गंवाने का आरोप लगाया था। इस शिकायत के बाद इस बार चुनाव आयोग ने टॉर्च की रोशनी हटा दी है तो गाजर चुनाव चिह्न को ही पूरी तरह भी हटा लिया है, जबकि ब्रश कायम है।
अधिकांश का चुनाव निशान टॉर्च
इस बार की आप उम्मीदवारों की स्थिति देखी जाए तो नांगलोई सीट से रघुविंद मैदान में हैं तो एक निर्दलीय उम्मीदवार रघुवेंद्र सिंह टॉर्च निशान के साथ मैदान में हैं। इसी तरह राजौरी गार्डन से उम्मीदवार जरनैल सिंह के सामने एक और निर्दलीय उम्मीदवार जरनैल सिंह रेजर चुनाव चिह्न के साथ मैदान में हैं।
इसी तरह तिलक नगर से आप उम्मीदवार जनरैल सिंह के सामने एक और जरनैल सिंह टॉर्च के साथ, वजीरपुर से राजेश गुप्ता के सामने राजेश टॉर्च के साथ, उत्तर नगर से नरेश बालियान के सामने नरेश कुमार बल्ले के साथ, द्वारका से आदर्श शास्त्री के सामने आदर्श कुमार ट्रंपट के साथ, नजफगढ़ से कैलाश गहलौत के सामने कैलाश चंद फूलों की टोकरी के साथ, मालवीय नगर से सोमनाथ भारती के सामने सोमनाथ हरी मिर्च के साथ, नई दिल्ली से अरविंद केजरीवाल के सामने अनिल कुमार टॉर्च के साथ, जंगपुरा से प्रवीण कुमार के सामने प्रवीण ब्रश के साथ, कालकाजी से अवतार सिंह के सामने अवतार सिंह टॉर्च के साथ, ग्रेटर कैलाश से सौरभ भारद्वाज के सामने संजय टॉर्च के साथ, संगम विहार से दिनेश के समने दिनेश प्रसाद टेलीविजन के साथ मैदान में हैं।
बताया जाता है कि एक दल के बड़े नेता ने कार्यकर्ताओं को आप उम्मीदवारों के नाम वाले या उससे मिलते जुलते निर्दलीय उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के निर्देश दिए थे लेकिन टॉर्च से रोशनी गायब हो जाने व गाजर हट जाने से इसका उस तरह से फायदा नहीं होगा जैसा योजना के तहत सोचा गया था।
वैसे आप के लिए राहत वाली खबर यह है कि गत चुनाव में 28 सीटें लेने वाली आम आदमी पार्टी को अब दिल्ली के इकलौते राज्य दल का दर्जा मिला हुआ है। ऐसे में उसके व निर्दलीय उम्मीदवार के ईवीएम पर क्रम में अंतर रहना संभव है। ईवीएम में एलफाबेटिकल के अलावा पहले राष्ट्रीय फिर राज्य व फिर अन्य दल व निर्दलीयों को क्रम मिलता है।