दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को इस तथ्य पर आश्चर्य व्यक्त किया कि राजधानी में उप-पंजीयक के कार्यालय से बड़ी मात्रा में दस्तावेज और भूमि रिकॉर्ड गायब हो गए हैं और अधिकारियों ने पंद्रह साल बाद इस मुद्दे की सूचना दी है। अदालत ने कहा यह चौंकाने वाला तथ्य है।
अदालत ने इस मुद्दे पर महानिरीक्षक (आईजी) पंजीकरण को सुनवाई की अगली तारीख पर शारीरिक रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया है।न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि इस मामले को लापरवाही से नहीं लिया जा सकता क्योंकि इससे साबित होता है कि दस्तावेजों को सुरक्षित नहीं रखा गया। अदालत ने कहा कि वह मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच का आदेश दे सकती हैं। क्योंकि दस्तावेजों के गायब होने के लिए बड़ी संख्या में अधिकारी जिम्मेदार हैं।
उन्होंने कहा कि मुमकिन नहीं है कि सब-रजिस्ट्रार के दफ्तर से ट्रक भरकर दस्तावेज इस तरह गायब हो जाएं और 15 साल बाद अधिकारी प्राथमिकी दर्ज करें। अदालत ने प्रमुख सचिव राजस्व को 8 फरवरी को वस्तुतः कार्यवाही में शामिल होने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा वे उन सभी सब-रजिस्ट्रारों की पूरी सूची चाहती है जो इस अवधि के दौरान वहां काम कर रहे थे। पुलिस जांच और दर्ज की गई प्राथमिकी की स्थिति को भी रिकॉर्ड में रखा जाए।
अदालत मोंक एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक फर्म की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। इसमें कहा गया था कि उसने कुछ कृषि भूमि के संबंध में वर्ष 1994 में छह बिक्री दस्तावेज पंजीकृत किए थे। फरवरी 1995 में याचिकाकर्ता के पक्ष में म्यूटेशन किया गया, जिसके बाद उसने मूल बिक्री विलेख प्राप्त किया। हालांकि याचिकाकर्ता ने 2013 में दस्तावेजों को खो दिया और सब-रजिस्ट्रार के अधिकारी से प्रमाणित प्रतियों की मांग की।
अयोग्य मैनेजर रखने वाले निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों पर कार्रवाई पर रोक
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (डीओई) को निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत् मैनेजरों के योग्य न होने पर स्कूलों के खिलाफ फिलहाल कोई ठोस कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है। सरकार ने जारी परिपत्र में निर्देश दिया था कि स्कूलों में तय नियमों के तहत मैनेजर योग्यता अनिवार्य है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने अंतरिम आदेश में मामले की सुनवाई 18 मई तय करते हुए कहा कि कोई भी कार्रवाई स्कूलों में लाखों छात्रों को प्रभावित कर सकती है। अदालत ने कहा कि जहां तक उन स्कूलों का संबंध है, जिनकी प्रबंधन योजनाओं को 2004 से पहले मंजूरी दी गई थी और उनके द्वारा प्रबंधन की योजनाओं के संबंध में कोई और मंजूरी नहीं मांगी जा रही है, जो प्रबंधक पहले से काम कर रहे हैं या जो इन द्वारा नियुक्त किए गए हैं स्कूलों को परेशान नहीं किया जाएगा। ब्यूरो