दिल्ली में एक बार फिर गलघोंटू यानी डिप्थीरिया बीमारी का दंश झेलना पड़ सकता है। पिछले वर्ष इस बीमारी के कारण दिल्ली के अस्पतालों में करीब 20 मासूमों की मौत हो गई थी। इसमें सर्वाधिक बच्चे उत्तर प्रदेश के थे।
दिल्ली के अस्पतालों में गलघोंटू का टीका उपलब्ध नहीं होना भी इसके पीछे अहम वजह थी। बताया जा रहा है कि अभी जून में ही गलघोंटू पीड़ित बच्चे अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें से एक बच्चे की मौत महर्षि वाल्मीकि अस्पताल में हो चुकी है। बारिश के दौरान बीमारी बढ़ने के आसार हैं।
मंगलवार को उत्तरी दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि 25 जून तक अस्पताल में गलघोंटू बीमारी से ग्रस्त 11 बच्चे भर्ती हैं। इनमें से 1 की मौत 4 जून को हो गई। बच्चे की पहचान से जुड़ी जानकारियां निगम की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
बताया जा रहा है कि निगम अबकी बार पहले से ही एंटी सीरम का बंदोबस्त में लग गया है। पिछले वर्ष सीरम न होने के पीछे पहले कसौली स्थित केंद्रीय प्रयोगशाला को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था, लेकिन बाद में जांच के बाद चिकित्सा निदेशक को सस्पेंड कर दिया था।
अब निगम के अधिकारी सीरम उपलब्ध कराने की तैयारियों में लग चुके हैं। डॉक्टरों की मानें तो आने वाले दिनों में बारिश का सिलसिला शुरू होते ही गलघोंटू के मामलों में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिल सकती है।