दूसरे राज्यों के लिए जाने वाली बसों में बैठे यात्रियों को देखकर ऐसा लगा कि संक्रमण से बचाव के लिए नियमों का पालन करना जरूरी नहीं है। नियमों की ऐसी धज्जियां उड़ाई जा रही थी जिसे देखकर लगा कि लॉकडाउन लागू में अगर थोड़ी भी देरी होती तो स्थिति और भी भयावह होती।
लॉकडाउन लागू होने से चंद घंटे पहले बसों और मेट्रो में यात्रियों की भीड़ बढ़ गई। मेट्रो में सीटें फुल होने के बाद हर तरफ यात्री खड़े होकर यात्रा करते नजर आए। इस दौरान कई बार सोशल डिस्टेंरसिंग और मास्क पहनने में भी नियमों की अनदेखी का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा।
विज्ञापन
दूसरे राज्यों के लिए जाने वाली बसों में बैठे यात्रियों को देखकर ऐसा लगा कि संक्रमण से बचाव के लिए नियमों का पालन करना जरूरी नहीं है। नियमों की ऐसी धज्जियां उड़ाई जा रही थी जिसे देखकर लगा कि लॉकडाउन लागू में अगर थोड़ी भी देरी होती तो स्थिति और भी भयावह होती।
लॉकडाउन लागू होने से पहले अपने घर जाने वालों में प्रवासी मजदूरों के अलावा 300 किलोमीटर के दायरे के निवासियों ने भी घरों की ओर रुख कर लिया। कंपनियोंमें काम करने वाले भी अकेले रहने वाले युवाओं ने भी अपने घरों तक पहुंचने के लिए बस, टैक्सी और कैब का सहारा लिया। हालांकि लॉकडाउन के दौरान सभी आवश्यक सेवाएं चलती रहेंगी, फिर भी पिछले साल की तरह इस बार भी लॉकडाउन लंबा न हो जाए, लोगों में इसकी चिंता भी दिखी।
विज्ञापन
एक की गलती, खामियाजा भुगतेंगे सैकड़ों
मेट्रो में 50 फीसदी यात्री में भी आवश्यक सेवाओं से जुड़े और जरूरी कार्यों के लिए ही यात्रा की अनुमति है। मेट्रो यात्रियों ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान नियमों का पालन करते हुए संक्रमण से बचाव करने की दिशा में सभी को सोचना चाहिए। इससे न केवल खुद बल्कि सभी को बचाव है। थोड़ी भी लापरवाही से हालात पहले ही बिगड़ चुके हैं, अब इसे नियंत्रित करने में सभी को अपनी भूमिका निभाना चाहिए। एक भी व्यक्ति की अनदेखी का खामियाजा सैकड़ों लोगों को भुगतना पड़ सकता है। लॉकडाउन लागू होने में अगर देरी होती तो हालात और बदतर होते।
आनंद विहार से सराय काले खां बस अड्डा के लिए जा रही एक बस यात्री ने खांसी होने पर बस के अंदर ही थूक फेंक दिया। इसके बाद सभी यात्रियों ने उसे तत्काल बाहर करने को कहा। मगर, गलती मानने पर कंडक्टर ने हिदायत देकर छोड़ दिया।
बसों के लिए करना पड़ा लंबा इंतजार
शाम के वक्त बसों में भीड़ बढ़ने की वजह से यात्रियों को बस स्टॉप पर काफी इंतजार करना पड़ा। सभी को घर पहुंचने की जल्दी थी, ऐसे में 50 फीसदी सीटें पहले ही फ़ुल होने की वजह से अधिक इंतजार करना पड़ा।