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दुष्कर्म और आपराधिक धमकी का मामला: कोर्ट ने भाजपा नेता शहनवाज हुसैन को भेजा समन, 20 अक्तूबर को होगी सुनवाई

Wed, 11 Oct 2023 03:52 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

दिल्ली की एक अदालत ने दुष्कर्म और आपराधिक धमकी के मामले में भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन को समन भेजा है। 20 अक्तूबर को इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई होगी।
 
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कोर्ट - फोटो : social media
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विस्तार
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अदालत ने दुष्कर्म के एक मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता सैयद शाहनवाज हुसैन को समन जारी कर तलब किया है। राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट वैभव मेहता ने दिल्ली पुलिस द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि हुसैन के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता।

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अदालत ने पीड़िता की ओर से दायर विरोध याचिका को स्वीकार कर लिया। जिसमें उसने दावा किया था कि पुलिस ने शुरू से ही इस मामले में नकारात्मक रुख अपनाया है और प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने में उन्हें पांच साल लग गए। उन्होंने कहा कि पुलिस जानबूझकर हुसैन के खिलाफ सबूत हासिल करने में विफल रही। अदालत ने आईपीसी की धारा 376/328/506 के तहत अपराध का संज्ञान लिया और हुसैन को तलब किया। उन्हें 20 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है।

आरोप है कि अप्रैल 2018 में शाहनवाज ने शिकायतकर्ता को एक फार्म हाउस पर ले जाकर नशीला पदार्थ पिलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने कथित तौर पर इस कृत्य का वीडियो भी बनाया और घटना का खुलासा करने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। शिकायतकर्ता का कहना था कि मामले में एफआईआर दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही दर्ज की गई है।
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मामले पर विचार करने के बाद अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता के मामले को शुरुआत में ही खारिज करने का कोई कारण नहीं है। कोर्ट ने कहा जब तक जांच अधिकारी यह स्थापित करने के लिए ऐसी सामग्री रिकॉर्ड पर नहीं लाता कि उसके साथ दुष्कर्म होने की कोई संभावना नहीं है, इस अदालत के पास उसके मामले को शुरू में ही खारिज करने का कोई कारण नहीं है।

अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता का बयान विश्वसनीय है या नहीं, इसका पता ट्रायल कोर्ट के समक्ष जांच के बाद ही लगाया जा सकता है। उन्होंने शिकायतकर्ता के आरोपों की सत्यता पर सवाल उठाने वाली अभियोजन पक्ष की दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के बयान में मामूली विरोधाभास उसकी बात पर पूरी तरह से अविश्वास करने का आधार नहीं हो सकता।

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