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वीवीआईपी चौपर डील केस : मिशेल के आवेदन पर कोर्ट ने जेल अधीक्षक को किया तलब

Wed, 27 Feb 2019 10:56 PM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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क्रिश्चियन मिशेल
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ब्रिटिश नागरिक क्रिश्चियन मिशेल जेम्स के आवेदन पर अदालत ने तिहाड़ जेल के अधीक्षक को रिकॉर्ड के साथ पेश होने का निर्देश दिया है। मिशेल ने आवेदन दायर कर कहा था कि उसे परेशान करने की मंशा से सामान्य जेल से निकालकर हाई सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। 
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उसका कहना है कि वह अभी विचाराधीन कैदी है और उसे हाई सिक्योरिटी सेल में छोटा राजन व अन्य खतरनाक अपराधियों के साथ रखा जा रहा है। 

पटियाला हाउस अदालत के विशेष सीबीआई जज अरविंद कुमार के समक्ष मिशेल के आवेदन पर सहायक जेल अधीक्षक ने जवाब पेश कर कहा कि मिशेल के आरोप पूरी तरह गलत हैं। 

सुरक्षा के मद्देनजर उसे हाई सिक्योरिटी सेल में शिफ्ट किया गया है। इस जवाब पर मिशेल के वकीलों ने आपत्ति करते हुए उसे वापस उसी जेल में भेजने का आग्रह किया। कोर्ट ने सहायक जेल अधीक्षक से पूछा कि क्या मिशेल को दूसरी जेल में शिफ्ट किया जा सकता है। 
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इस पर अधिकारी ने बताया कि वह सहायक अधिकारी हैं और इस सवाल का जवाब जेल अधीक्षक ही दे सकते हैं। कोर्ट ने इसके बाद मिशेल के सभी दस्तावेज, मिलने वालों की सूची के साथ जेल अधीक्षक को बृहस्पतिवार को पेश होने का निर्देश दिया है। 
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कोर्ट के समक्ष मिशेल की ओर से अधिवक्ता एलजो के जोसेफ व विष्णु शंकर ने आवेदन पेश कर कहा कि उसे अवैध तरीके से जेल नंबर सात से जेल नंबर दो में शिफ्ट कर दिया गया है। यह उसे परेशान करने और उस पर दबाव डालने के लिए किया गया है। 

मिशेल वीवीआईपी चौपर डील मामले के तीन बिचौलियों में से एक है। सीबीआई का आरोप है कि अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीद मामले में करीब 2666 करोड़ का नुकसान सरकार को हुआ था। ईडी के मुताबिक, इस डील में मिशेल ने 225 करोड़ की घूस खाई थी। ईडी का दावा है कि मिशेल ने दूसरे रक्षा सौदों में भी घूस खाई है और उसकी जांच होनी है।

हाईकोर्ट में दायर की जमानत याचिका
निचली अदालत से खारिज होने के बाद मिशेल ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की है। निचली अदालत ने सीबीआई व ईडी की दलीलों से सहमति जताते हुए उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उसका कहना है कि उसे 4 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। 

उससे काफी पहले पूछताछ पूरी हो चुकी है। उसका कहना था कि सीबीआई व ईडी ने 60 दिन की तय सीमा पूरी होने के बाद भी आरोप पत्र कोर्ट में पेश नहीं किया है। इन हालात में जमानत उसका वैधानिक अधिकार है। इसलिए उसे जमानत प्रदान की जाए। यह याचिका बुधवार शाम तक सुनवाई के लिए सूचीबद्घ नहीं हो पाई थी।
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