दिल्ली की एक अदालत ने भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उपचार मुहैया कराने केे लिए तिहाड़ जेल प्रशासन को आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह राज्य का कर्तव्य है कि वह जीवन को संरक्षित करे, चाहे कोई व्यक्ति जेल में हो या जेल के बाहर। आजाद एक रक्त संबंधी बीमारी की चपेट में हैं।
कोर्ट ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए आजाद को जरूरत पड़ने पर चिकित्सा उपचार के आदेश दिए थे। वहीं, कोर्ट में जांच अधिकारी द्वारा मेडिकल रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने के चलते नौ जनवरी तक सुनवाई टाल दी गई थी।
आजाद के इलाज के लिए अधिवक्ता मेहमूद प्राचा ने अर्जी दायर की थी। इस अर्जी में कहा गया था कि आजाद को खून के गाढ़ा होने की बीमारी पॉलीसीथिमिया है और उसका नियमित इलाज कराने की जरूरत है। उसका इलाज एम्स के हेमाटोलोजी विभाग में प्रोफेसर ऋषि धवन की देखरेख में चल रहा है और उसे दोबारा चेकअप की जरूरत है।
बता दें कि पुलिस ने जामा मस्जिद से भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर को हिरासत में ले लिया था। बाद में पुलिस ने चंद्रशेखर पर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने, लोगों को उकसाने और दंगा भड़काने समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर उसे शनिवार दोपहर गिरफ्तार कर लिया। चंद्रशेखर के अलावा पुलिस ने हिंसा फैलाने के आरोप 15 लोगों को गिरफ्तार किया था।
इससे पहले दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर पुलिस को चकमा देकर वहां से भागने में कामयाब रहा था। लेकिन शाम में एक बार फिर चंद्रशेखर जामा मस्जिद में मौजूद अपने समर्थकों के बीच पहुंच गया और नारेबाजी शुरू कर दी। वहां उन्होंने कहा था कि जब तक यह काला कानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा।