दिल्ली की एक कोर्ट ने शुक्रवार को झारखंड में महुआगढ़ी कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़े एक मामले में आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता, पूर्व संयुक्त सचिव (कोयला) के एस क्रोफा और तत्कालीन निदेशक के सी समारिया को बरी कर दिया।
राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर स्थित विशेष अदालत ने शुक्रवार को झारखंड के महुआगढ़ी कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व कोयला सचिव को दोषमुक्त करार दिया।
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अदालत ने अपने आदेश में पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता, पूर्व संयुक्त सचिव (कोयला) के एस क्रोफा और तत्कालीन निदेशक के सी समरिया को बरी कर दिया।
विशेष न्यायाधीश संजय बंसल ने अपने फैसले में कहा कि इन अधिकारियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले। हालांकि, कोर्ट ने जास इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल लिमिटेड और इसके तत्कालीन निदेशक मनोज कुमार जायसवाल को कोयला ब्लॉक आवंटन में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का दोषी पाया।
यह मामला कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसमें कंपनी पर गलत जानकारी देकर लाभ लेने का आरोप था। कोर्ट ने पाया कि जास इंफ्रास्ट्रक्चर और जायसवाल ने नियमानुसार प्रक्रिया का पालन नहीं किया। सजा पर बहस 8 जुलाई, 2025 को होगी।
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इस फैसले से कोयला आवंटन घोटाले के अन्य मामलों पर भी असर पड़ सकता है, जो लंबे समय से चर्चा में हैं। यह निर्णय कोयला मंत्रालय के पूर्व अधिकारियों के लिए राहत भरा है, जबकि दोषी कंपनी और इसके निदेशक को कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है।