फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi : फंड की कमी के कारण स्मारकों के संरक्षण कार्य की थम गई रफ्तार, कोई नई योजना भी नहीं हो रही तैयार

Fri, 07 Mar 2025 03:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा ललित कौशिक, नई दिल्ली

सार

फंड की कमी के कारण स्मारकों के संरक्षण कार्य की रफ्तार थम रही है। स्मारकों में संरक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। स्मारकों के संरक्षण को लेकर कोई नई योजना भी तैयार नहीं हो पा रही है।  
विज्ञापन
कुतुब मीनार - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

फंड की कमी के कारण स्मारकों के संरक्षण कार्य की रफ्तार थम रही है। एतिहासिक स्मारकों में संरक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। स्मारकों के संरक्षण को लेकर कोई नई योजना भी तैयार नहीं हो पा रही है।  

विज्ञापन


दिल्ली में लालकिला, पुराना किला, कुतुबमीनार, हुमायूं का मकबरा, जंतर-मंतर, फिरोजशाह कोटला, बड़ा गुबंद, सफदरजंग मकबरा सहित दूसरे कई स्मारक हैं जिनमें संरक्षण के कार्य धीमी रफ्तार से चल रहे हैं। कुछ स्मारकों में फंड न होने के कारण काम ठप है।

पुराना किला में संग्रहालय की टूटी छत का कार्य भी मरम्मत के लिए अटका पड़ा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) दिल्ली मंडल के अधीन 173 केंद्रीय संरक्षित स्मारक है। इसमें 11 स्मारकों में पर्यटकों को टिकट के आधार पर प्रवेश मिलता है।
विज्ञापन


फंड की कटौती बनी संरक्षण में चुनौती : इसमें टिकट वाले स्मारकों में कुतुबमीनार, लालकिला, हुमायूं का मकबरा, तुगलकाबाद किला, खान-ए-खाना मकबरा, सुल्तान गढ़ी का मकबरा, हौज खास स्मारक परिसर, पुराना किला, जंतर-मंतर, सफदरजंग मकबरा, फिरोजशाह कोटला शामिल है।

एसआई के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली मंडल को करीब 40-45 करोड़ रुपये का फंड स्मारकों के संरक्षण को लेकर मिलता है, लेकिन उसमें कटौती होने से संरक्षण कार्य अटक गए हैं। जिनको स्मारकों के संरक्षण का ठेका दिया जाता है उनका भी बकाया बिल बढ़ता जा रहा है। फंड न होने से संरक्षण कार्य को लेकर कोई नई निविदा भी जारी नहीं कर पा रहे हैं। 

 मूलभूत सुविधाओं को भी नहीं कर पा रहे अपग्रेड
अधिकारी ने बताया कि हर स्मारक को उसके क्षेत्रफल और बनावट के अनुसार फंड आवंटित होता है। ऐसे में यह बताना बेहद मुश्किल है कि किस स्मारक को कितना फंड जारी करते हैं। यह जरूर है कि फंड की कमी चल रही है।

आलम यह है कि पाथवे तैयार करने, मूलभूत सुविधाओं को भी अपग्रेड नहीं कर पा रहे है। संरक्षण कार्य न होने से स्मारक के ढांचे को नुकसान होने का डर बना रहता है। क्योंकि हर स्मारक समय-समय पर संरक्षण कार्य मांगती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें