राजधानी दिल्ली में कांग्रेस नेता की हत्या का खुलासा हो गया है। पुलिस ने हत्या के आरोपी पिता और पुत्र को गिरफ्तार कर लिया है। नौ साल पहले हुई पिटाई का बदला लेने के लिए आरोपी ने नाबालिग बेटे के साथ मिलकर कांग्रेस नेता को पहले बैट से पीटा फिर चार गोलियां मारीं थीं।
दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में शुक्रवार सुबह प्रॉपर्टी डीलर व कांग्रेसी नेता लखपत सिंह कटारिया उर्फ लख्खी की हत्या नौ साल पुरानी रंजिश में की गई थी। हत्यारोपी खुशीराम (47) ने पुलिस पूछताछ में यह बात बताई। खुशीराम और उसके 17 वर्षीय बेटे को पुलिस ने लखपत की हत्या के आरोप में पकड़ा है।
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दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त अंकित चौहान ने बताया कि पूछताछ में खुशीराम ने बताया कि 9 जनवरी 2016 को एक प्लॉट बेचने को लेकर हुए विवाद में लखपत ने अपने भाई धर्मेंद्र और कुछ लोगों के साथ मिलकर उसे जमकर पीटा था।
हाथ-पैर टूटने के कारण वह 9 माह बिस्तर पर था। तभी उसने बदला लेने की ठान ली थी। शुक्रवार को वह पिस्टल, क्रिकेट बैट के साथ अपने नाबालिग बेटे के साथ विजय मंडल पार्क पहुंचा। आरोपियों ने पहले लखपत सिंह को बैट से बुरी तरह पीटा।
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बाद में चार गोलियां मारकर उनकी हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल बाइक व अन्य सामान बरामद कर लिया है। दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त ने बताया कि लखपत सिंह कटारिया परिवार के साथ बेगमपुर इलाके में रहते थे।
लखपत का था प्रॉपर्टी का कारोबार
इनके परिवार में पत्नी वीरमति, बेटा शिवम और एक बेटी है। लखपत कांग्रेस से जुड़े थे। उनका प्रॉपर्टी का कारोबार था। रोजाना मॉर्निंग वॉक के लिए घर से विजय मंडल पार्क में जाते थे।
शुक्रवार सुबह वह पार्क में पहुंचे तो दो लोगों ने उन्हें बैट से पिटना शुरू कर दिया। पार्क के गार्ड उन्हें बचाने आए तो आरोपियों ने पिस्टल तान दी। बाद में आरोपियों ने लखपत सिंह को चार गोली मार दी। टांग, पेट, गर्दन व सिर में गोली लगने से उनकी मौत हो गई। बाद में आरोपी बाइक पर मौके से फरार हो गए।
18 का होने से एक दिन पहले ली जान
पुलिस को पता चला है कि खुशीराम का बेटा 27 सितंबर 2025 को 18 साल का होने वाला था। खुशीराम उससे पहले ही वारदात को अंजाम देकर बेटे को नाबालिग होने का फायदा दिलाना चाहता था। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी सीधे घर पहुंचे। पुलिस ने बाइक भी बरामद कर ली है।
लखपत सिंह की हत्या के बाद मालवीय नगर थाना पुलिस ने रूट पर लगे 650 सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल की। जांच करते हुए टीम बाहरी दिल्ली औचंदी गांव पहुंची और वहां से खुशीराम और उसके बेटे को दबोचा। खुशीराम ने वारदात में अपना हाथ होने की बात स्वीकार कर ली।
नाबालिग बेटे ने कई दिनों तक की रेकी
पूछताछ में आरोपी खुशीराम ने बताया कि बेटे ने लखपत के हर मूवमेंट पर नजर रखी और यह रेकी वारदात के दिन काम आई। खुशीराम ने बताया कि बेगमपुर में उसका मकान था। लखपत मकान बेचने का दबाव बना रहा था मना करने पर लखपत सिंह ने उसे पीटा था।
खुशीराम की शिकायत पर लखपत के खिलाफ केस दर्ज हुआ था लेकिन ऊंची पहुंच का फायदा उठाकर कांग्रेस नेता ने उल्टा खुशीराम और उसके परिवार पर मुकदमा दर्ज करा दिया था, जिसका केस अब तक चल रहा है।