भाई भतीजावाद और फिजूल खर्ची के लिए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को भला-बुरा कहने वाली आम आदमी पार्टी भी अब इसी दलदल में धंसती दिखाई दे रही है।
कल तक बिजली के बिल के तौर पर लाखों खर्च करने वाले आप के मुख्यमंत्री केजरीवाल पर अब अपने खास लोगों को सरकारी पदों पर बिठाने भी मामला सामने आया है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री और कैबिनेट में शामिल मंत्रियों को उनके काम में मदद देने के नाम पर सरकार ने 200 कर्मचारियों की नियुक्ति की है। बता दें कि यह सभी अस्थाई पद हैं और इनकी नियुक्ति संविदा के आधार पर की गई है।
इस बात का खुलासा खुद सरकार ने विधानसभा में उठाए गए एक सवाल के लिखित जवाब में किया है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक ओपी शर्मा ने सरकार से यह सवाल पूछा था।
सवाल का जवाब विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन दिया गया। जवाब में बताया गया है कि पिछली सरकार में ऐसी 98 नियुक्तियां की गई थीं। यानि आप सरकार ने दोगुने से ज्यादा पद बना कर अपने लोगों को सरकार के विभिन्न पदों पर नियुक्त किया है।
सीमा से कई गुना ज्यादा अधिकारियों की नियुक्ति
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक मुख्यमंत्री कार्यालय में रखे गए 200 में से 28 लोगों को को-टर्मिनस आधार पर रखा गया है। इन 200 कर्मचारियों में से 199 अधिकारी सीएमओ और मंत्रियों के कार्यालय में काम कर रहे हैं।
चौंकाने वाली बात ये है कि केवल केजरीवाल के ऑफिस में ही ऐसे 79 कर्म्रचारियों की नियुक्ति की गई है। इन्हें सीएम और उनके कैंप ऑफिस में निजी सहायक, सलाहकार, संयुक्त सचिव, चपरासी, ड्राइवर, मीडिया सलाहकार और राजनीतिक सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया गया है।
मजेदार बात ये है कि जब सरकार से पूछा गया कि उनके पास सीएम और मंत्रियों की मदद के लिए कितने लोगों की नियुक्ति का अधिकार है? तो जवाब में बताया गया है कि मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी सहित ऐसे 81 पदों पर नियुक्ति का अधिकार सरकार को है।
हर महीने लाखों खर्च किए जा रहे
बात केवल निर्धारित पदों से ज्यादा लोगों की नियुक्ति तक ही सीमित नहीं है। इन पदों पर जिन लोगों की नियुक्ति की गई है उन पर दिल्ली की जनता की गाढ़ी कमाई भी खर्च की जा रही है।
को-टर्मिनस स्टॉफ के तौर पर नियुक्त किए गए लोगों को वेतन के तौर पर 18000 से 1,15000 रुपये महीने तक दिया जा रह है। इतना ही नहीं सीएमओ ऑफिस में नियुक्त किए गए इस स्टॉफ को वेतन के अलावा उनके पद के मुताबिक घर, फोन से लेकर कार तक की सुविधा दी जा रही है।
इन नियुक्तियों पर किस कदर सरकारी पैसा खर्च किया जा रहा है इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल के निजी सचिव के तौर पर नियुक्त किए गए विभव कुमार को हर महीने लगभग 98 हजार से भी ज्यादा की सैलरी दी जाती है।
सरकारी विभागों पर निगाह रखते हैं ये खास लोग!
इसी तरह मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहाकार नगेंद्र शर्मा को हर महीने 1,15,881 रुपये की सैलरी दी जाती है। जबकि आशीष तलवार के राजनीतिक सलाहकार के तौर पर नियुक्त स्वाति मालिवाल को भी लगभग इतना ही वेतन हर महीने मिलता है।
इन नियुक्तियों के बारे में एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि यह सरकार में बड़ रहे अविश्वास की ओर भी संकेत करती हैं क्योंकि, इनमें से कई अधिकारियों को सरकार के कुछ विभागों पर निगाह रखने का काम दिया गया है।
क्या वास्तव में केजरीवाल सरकार अपने कर्मचारियों और अधिकारियों से इतनी घबरा गई है कि उन पर निगाह रखने के लिए उसे अलग से अपने लोगों को रखना पड़ रहा है और उन पर जनता के पैसे पानी की तरह बहाए जा रहे हैं?