वहीं, मुख्य सचिव के वकील ने पुलिस के लगाए गए आरोपों का समर्थन कर दलील दी कि चार्जशीट पर संज्ञान की स्टेज पर यही देखा जाना चाहिए कि पहली नजर में आरोपों के लेकर पर्याप्त तथ्य हैं या नहीं। शेष साक्ष्यों पर आरोप तय करते हुए गौर किया जा सकता है।
दूसरी तरफ, अदालत ने अधिवक्ता बीएस जून और मोहम्मद इरशाद की ओर से 14 अगस्त को दायर अर्जी को खारिज कर दिया। उनकी मांग थी कि पुलिस को चार्जशीट के अंश मीडिया में लीक करने से रोका जाए क्योंकि अभी तक अदालत ने इस पर संज्ञान भी नहीं लिया है।
उन्होंने मामले में जांच अधिकारी और अतिरिक्त डीसीपी हरेंद्र सिंह पर बीजेपी के प्रवक्ता की तरह बर्ताव करने का भी आरोप लगाया था। इस मुद्दे पर पुलिस ने तर्क रखा कि आप नेता जांच एजेंसी का अपमान कर रही है। उसकी छवि बिगाड़ने के साथ कोर्ट की कार्यवाही को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है।
दायर आरोपपत्र में आप के 11 विधायकों के साथ मुख्यमंत्रीऔर उपमुख्यमंत्री को भी आरोपी बनाया गया है। आरोपी विधायकों में अमानतुल्लाह खान, प्रकाश जारवाल, नितिन त्यागी, ऋतुराज गोविंद, संजीव झा, अजय दत्त, राजेश ऋषि, राजेश गुप्ता, मदन लाल, प्रवीण कुमार और दिनेश मोहनिया का नाम है। मुख्य सचिव पर 19 फरवरी को सीएम आवास में देर रात बैठक के दौरान कथित रूप से यह हमला हुआ था।