दिल्ली के सरकारी विश्वविद्यालयों की हालत पर कैग रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। कुछ विश्वविद्यालयों की हालत बेहद खराब है। दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी आज भी एक स्कूल की बिल्डिंग में चल रही है, जबकि तीन विश्वविद्यालयों में कुल मिलाकर केवल तीन छात्र ही दाखिल हैं। पिछले साल भी यह संख्या सिर्फ 20 थी। इसी तरह दिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी सीमित कमरों में चल रही है और वहां पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य को लेकर भी स्पष्टता नहीं है।
विधानसभा में शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि रिपोर्ट से साफ है कि पिछले वर्षों में उच्च शिक्षा व्यवस्था में गंभीर गड़बड़ियां रही हैं। दिल्ली विधानसभा में 2018 से 2023 के बीच विश्वविद्यालयों के कामकाज पर आई कैग रिपोर्ट को लेकर सरकार ने बड़ा खुलासा किया। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने सदन में कहा कि रिपोर्ट ने विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली, नीतियों और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में वित्तीय कुप्रबंधन, मानव संसाधन की कमी और अकादमिक स्तर पर कमजोरियों को साफ तौर पर उजागर किया गया है। कई फैसले बिना योजना के लिए गए, जिनका असर आज भी दिख रहा है। दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि पॉलिटेक्निक संस्थानों को इसमें शामिल तो कर दिया गया, लेकिन इससे छात्रों और शिक्षकों के सामने अनिश्चितता पैदा हो गई। कई जगह छात्र और शिक्षक दोनों विरोध कर रहे हैं।
दिल्ली में एडमिशन सिस्टम रहा भ्रष्ट : कैग रिपोर्ट से पता चला कि 16 साल तक एडमिशन सिस्टम सही तरीके से काम नहीं किया। न स्पष्ट एडमिशन पॉलिसी थी, न माइग्रेशन का सिस्टम। पांच साल तक विश्वविद्यालयों के ऑडिटेड अकाउंट्स भी सदन में पेश नहीं किए गए। इसके अलावा फंड के गलत इस्तेमाल और मनमानी नियुक्तियों के मामले भी सामने आए हैं। एमबीए जैसे कोर्स लंबे समय तक बिना मान्यता के चलते रहे और सिलेबस कई साल तक अपडेट नहीं हुआ। इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस की भी भारी कमी रही। हालांकि, मंत्री ने कहा कि अब स्थिति बदली जा रही है। सरकार ने 2023-25 के बीच 3014 ईडब्ल्यूएस छात्रों को 44 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप दी है। कैंपस टू मार्केट योजना के तहत 100 स्टार्टअप्स को मदद दी गई है और छात्रों को नए अवसर दिए जा रहे हैं।
रिपोर्ट पीएसी को भोजने की सिफारिश : मंत्री ने सदन से अपील की कि इस रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा हो और इसे लोक लेखा समिति (पीएसी) को भेजा जाए, ताकि पूरे मामले की गहराई से जांच हो सके और जिम्मेदारी तय की जा सके। उन्होंने कहा कि पहले शिक्षा में केवल प्रचार हुआ, अब सरकार जमीन पर परिणाम देने पर काम कर रही है।
विधानसभा में कैग की विभिन्न रिपोर्टों पर चर्चा के दौरान कई विभागों में गंभीर कमियां सामने आईं। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि अब जवाबदेही तय करने के लिए सभी रिपोर्टों पर तेजी से कार्रवाई होगी। कैग रिपोर्ट में शीशमहल से जुड़े मुद्दों के अलावा जीएसटी, वैट, स्टाम्प और रजिस्ट्रेशन शुल्क, मोटर वाहन कर और आबकारी की वसूली में गंभीर गड़बड़ियों का जिक्र है। इसके साथ ही सूचना एवं प्रचार, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास और राजस्व विभाग के कामकाज में भी कमियां पाई गई हैं।