'आतिशी की सदस्यता तत्काल हो रद्द'
सरकार का आरोप है कि सदन के भीतर इस्तेमाल की गई भाषा न सिर्फ असंसदीय थी, बल्कि सिख समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली भी थी। दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल ने बुधवार को मीडिया को जानकारी दी कि विधानसभा अध्यक्ष को लिखित रूप से तीन साफ मांगें रखी गई हैं। इसमें नेता विपक्ष आतिशी की सदस्यता तत्काल रद्द करने के साथ उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने की मांग है।
इसके अलावा विधान सभा अध्यक्ष अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सख्त दंडात्मक कार्रवाई करें। यह पत्र मंत्री प्रवेश वर्मा, पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा, मंत्री कपिल मिश्रा, मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह और मुख्य सचेतक अभय वर्मा की ओर से सौंपा गया है।
नेता प्रतिपक्ष की भाषा अस्वीकार्य
मीडिया से बात करते हुए मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि गुरु तेग बहादुर की शहादत पर नियम 270 के तहत चल रही विशेष चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष द्वारा जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया गया, वह पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा, आजादी के बाद किसी भी सदन में किसी भी गुरु साहिब के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल कभी नहीं हुआ। जो व्यक्ति विधानसभा के पटल से गुरु तेग बहादुर का अपमान करता है, उसका स्थान सदन में नहीं हो सकता।
सिरसा ने दो टूक कहा कि ऐसे लोगों के लिए विधानसभा नहीं, बल्कि जेल ही उचित जगह है। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर सिख समाज में भारी आक्रोश है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (डीएसजीएमसी) और कई सिख संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनके मुताबिक, यह मुद्दा सिर्फ दिल्ली या देश तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में सिख समुदाय और आम लोगों के बीच गहरी नाराजगी है।
नेता प्रतिपक्ष का रवैया गैर-जिम्मेदाराना - सिरसा
मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष का रवैया गैर-जिम्मेदाराना रहा है। एक दिन पहले आतिशी ने बार-बार प्रदूषण पर चर्चा कराने की मांग की, लेकिन जिस दिन प्रदूषण पर विधिवत चर्चा रखी गई, उस दिन वे सदन में मौजूद नहीं थीं। सिरसा ने कहा कि यह अनुपस्थिति इस बात का संकेत है कि उन्हें अपने कृत्य की गंभीरता और उसके सार्वजनिक असर का अंदाजा था।
उन्होंने परंपरा और संसदीय मर्यादा का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे अहम विषयों पर चर्चा के दौरान सदन के नेता और नेता प्रतिपक्ष दोनों का मौजूद रहना जरूरी होता है। इसके बावजूद गुरु तेग बहादुर के सम्मान से जुड़े प्रस्ताव पर न तो कोई सकारात्मक वक्तव्य दिया गया और न ही प्रदूषण पर चर्चा के दिन सदन में आना जरूरी समझा गया। सिरसा ने इसे नैतिक जिम्मेदारी से भागना बताया और कहा कि जनता ऐसे व्यवहार को न स्वीकार करेगी और न ही भूल पाएगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री प्रवेश वर्मा, कपिल मिश्रा भी मौजूद रहे। सरकार की ओर से साफ संकेत दिए गए हैं कि इस मामले में पीछे हटने का सवाल नहीं है और विधानसभा अध्यक्ष से कड़ी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।