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डोर स्टेप डिलीवरी से जुड़ी 60 नई सेवाएं, मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दी मंजूरी

Thu, 20 Dec 2018 04:13 PM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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arvind kejriwal
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल डोर स्टेप डिलीवरी सेवाओं के विस्तार के मूड में हैं। इसलिए बुधवार को उन्होंने 60 और नई सुविधाओं को इस सेवा के अंतर्गत जोड़ने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इस बाबत बुधवार को दिल्ली कैबिनेट की बैठक हुई है, जिसमें सेवा के विस्तार में एग्जीक्यूटिव की संख्या बढ़ाए जाने को लेकर फैसला लिया गया है। बता दें अब इस सेवा के तहत कॉल एग्जीक्यूटिव की संख्या बढ़ाकर 600 कर दी गई है।
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क्या है डोर स्टेप डिलीवरी

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर यह सेवा शुरू की गई थी। इसे सरकार ने पब्लिक सर्विस के तहत पिछले साल 16 नवंबर को मंजूरी दी। 10 सितंबर को यह योजना 40 कॉल एक्जीक्यूटिव के साथ शुरू हुई। इस सेवा के जरिए दिल्ली में मोबाइल सहायक की तरफ से किसी भी विभाग में सबमिट किए गए मामलों में से कोई भी मामला संबंधित मंत्री की मंजूरी के बिना रिजेक्ट नहीं किया जा सकेगा। सेवा को शुरू करने के पीछे सरकार का मानना है कि कई मामलों में निचले स्तर पर रिश्वत के लिए आवेदनों को रिजेक्ट कर दिया जाता है या फिर उनमें देरी की जाती है। इसलिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद डोर स्टेप डिलीवरी ऑफ सर्विसेज योजना की निगरानी कर रहे हैं।
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सेवा में नए बदलाव

डोर स्टेप डिलीवरी सेवा के तहत सुविधाओं को बढ़ाने पर इनकी संख्या और भी बढ़ाई जा सकती है। आने वाले दिनों में लोगों से लिए गए फीडबैक पर दिल्ली सरकार की ओर से विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रस्ताव पर सर्वप्रर्थम एक पीआरआई लाइन शुरू की गई थी, जिसमें 30 चैनल का कॉल सेंटर था। मगर जैसे ही यह सेवा शुरू की गई तो भारी संख्या में लोगों के कॉल आने लगे। इस वजह से एक्जीक्यूटिव की संख्या बढ़ा दी गई। इसी दौरान पीआरआई लाइन की संख्या 11 करने का फैसला लिया गया है।
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फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए स्थायी पद को मंजूरी

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली कैबिनेट की बैठक में फास्ट ट्रैक अदालतों के लिए वर्तमान में अस्थायी पदों को स्थायी पदों में बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत दिल्ली सरकार पर नौ करोड़ का अतिरिक्त भार आएगा। बता दें वर्तमान में अस्थायी पदों पर अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों के 18 पदों के साथ 86 आवश्यक कर्मचारियों के पद शामिल हैं। बता दें कि वर्ष 2005 में कैबिनेट ने अस्थायी तौर पर 115 पदों को स्वीकृति दी थी। इसमें 20 पद अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों की थी।
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