दिल्ली सरकार पहली बार क्लस्टर स्कीम में लो फ्लोर एसी बसें लाने जा रही है। बृहस्पतिवार को दिल्ली कैबिनेट ने 1,000 लो फ्लोर एसी बस लाने के परिवहन विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बसें खरीदने की प्रक्रिया अगले साल जुलाई से अक्तूबर के बीच पूरी कर ली जाएगी।
कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि 1000 बसें लाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। दिल्ली इंटीग्रेटेड मॉडल ट्रांजिट सिस्टम (डिम्ट्स) निविदा प्रक्रिया पर काम करेगा। बसों की पहली खेप जुलाई 2019 में दिल्ली में आ जाएगी। अगले चार महीनों में प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। निविदा में प्रावधान किया गया है कि चयनित कंपनी बस मुहैया कराते वक्त उसमें सीसीटीवी कैमरा व आटोमैटिक व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (एवीटीएस) जैसी अत्याधुनिक सुविधा लगाकर दे।
दिल्ली सरकार के अधिकारियों का कहना है कि सभी बसें क्लस्टर स्कीम में आएंगी। बस आपूर्ति करने वाली कंपनी के पास ही उसके परिचालन व रखरखाव का जिम्मा भी होगा। डिम्ट्स इन बसों के रूट तय करेगा। जरूरी हुआ तो मौजूदा 657 रूट्स में फेरबदल भी किया जा सकता है। गौतरलब है कि दिल्ली में डीटीसी और क्लस्टर स्कीम में अभी 5,460 बसें हैं। 2012 के बाद बसों के बेड़े में एक भी नई बस नहीं जुड़ सकी है। इसका सीधा असर सार्वजनिक परिवहन सेवा पर पड़ा है।
इस साल अभी तक तीन हजार बसों को मिली मंजूरी
दिल्ली सरकार ने इस वर्ष क्लस्टर स्कीम में अब तक 3000 बसों को लाने के प्रस्ताव को मंजूर किया है। इसमें एक हजार ई-बस व एक हजार स्टैंडर्ड फ्लोर बसें भी शामिल है। सरकार ने स्टैंडर्ड फ्लोर बसों की खरीद का आदेश जारी कर दिया है। अगले साल अप्रैल में 25 फीसदी बसें सड़कों पर आ जाएंगी। दूसरी तरफ ई-बस का ट्रायल चल रहा है। दिसंबर के पहले पखवाड़े में इसकी रिपोर्ट मिल जाएगी। सरकार का दावा है कि दिसंबर 2019 तक तीन हजार अतिरिक्त बसें दिल्ली की सड़कों पर पहुंच जाएंगी।