फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली कैबिनेट ने मलिन बस्ती नीति को दी मंजूरी, मिशन स्वराज का भी होगा गठन

Sat, 09 Jul 2016 01:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने शुक्रवार को मलिन बस्ती नीति 2015 (स्लम पॉलिसी 2015) को मंजूरी दे दी। इसके तहत उन्हीं झुग्गी निवासियों को वैकल्पिक निवास मिलेगा, जिनका नाम 2012, 2013, 2014 या 2015 में से किसी एक मतदाता सूची में रहा होगा।
विज्ञापन


साथ ही जिस वर्ष पुनर्वास के लिए सर्वे किया गया है, उस वर्ष की मतदाता सूची में भी नाम होना चाहिए। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को सभी बस्तियों के लिए नोडल एजेंसी के तौर पर नियुक्त किया गया है।

नीति में कहा गया है कि ऐसी झुग्गी बस्ती जो जनवरी 2006 के पहले बसी हो और जो झुग्गी जनवरी, 2015 तक बन गई है, उसे बिना वैकल्पिक मकान दिए हटाया नहीं जाएगा।
विज्ञापन

वैकल्पिक आवास के बिना नहीं हटेंगी बस्ती

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) अधिनियम 2011 को भी नीति में शामिल किया गया है। जिसमें साफ है कि 1 जनवरी, 2006 तक बस चुकी झुग्गी बस्ती को बिना वैकल्पिक निवास दिए हटाया नहीं जाएगा।

जहां झुग्गी, वहीं मकान की नीति पर पुनर्वास की कोशिश होगी। सरकार इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना का सहारा लेगी। इसमें सभी के लिए मकान के दिशा-निर्देशों और मास्टर प्लान 2021 में झुग्गी पुनर्वास के लिए जमीन एक संसाधन के तौर पर उपयोग की छूट है।

नीति में यह भी तय किया गया है कि जनवरी 2015 के बाद कोई झुग्गी नहीं बनेगी। इसके लिए सेटेलाइट मैपिंग और एजेंसी के साथ हर तीन महीने में सर्वे होगा। हर बस्ती में अतिक्रमण के खबर देने के लिए लोग सूचीबद्ध किए जाएंगे।

पॉलिसी में क्या है खास

- पायलट प्रोजेक्ट में 23 क्लस्टर को पहले चरण में 5 किमी के दायरे में दिए जाएंगे मकान
- झुग्गी वालों को 1.12 लाख रुपये में मिलेगा फ्लैट, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के झुग्गी वाले को सिर्फ 31 हजार रुपये चुकाने होंगे
-10 साल तक लीज पर मिलेंगे फ्लैट
-एक ही जमीन पर दो मंजिल बना हुआ है और अलग-अलग परिवार के नाम राशन कार्ड बना है तो वे दो फ्लैट्स के हकदार होंगे।
-फ्लैट्स के लिए जरूरी है कि परिवार में वयस्क एक व्यक्ति जरूर हो, जिसका 2012-14 के बीच मतदाता सूची में नाम रहा हो।
-पासपोर्ट, बिजली बिल, बैंक पासबुक, जाति प्रमाणपत्र, पेंशन कार्ड, विकलांगता प्रमाणपत्र, सरकारी स्वास्थ्य बीमा, स्कूल के बच्चे का आई कार्ड प्रमाण मान्य।

ये रहेगी स्लम फ्री दिल्ली की चुनौतियां
1. जिस एजेंसी की जमीन से झुग्गी हटाकर दूसरी जगह बसाई जाएगी, उस एजेंसी को झुग्गी बसाए जाने वाली जगह के सर्किल रेट के हिसाब से कीमत, निर्माण शुल्क चुकाना होगा। कई जगह यह बड़ी राशि होगी, जिसके लिए एजेंसी आसानी से तैयार नहीं होगी। डीडीए के उपाध्यक्ष आपत्ति दर्ज करा चुके हैं।
 2. दूसरी चुनौती कठपुतली कॉलोनी मॉडल पर इन सी टू पॉलिसी में प्राइवेट बिल्डर को पुनर्वास का काम सौंपना है। कई साल से कठपुतली कालोनी पुनर्वास का प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाया है।
विज्ञापन

मिशन स्वराज का होगा गठन

- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने शुक्रवार को मोहल्ला सभा प्रोजेक्ट को गति देने के लिए मिशन स्वराज के गठन को मंजूरी दी है। उपमुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मिशन स्वराज स्टेट लेवल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट के तौर पर काम करेगा। इसमें मोहल्ला सभा प्रोजेक्ट के लिए सभी एजेंसियों के साथ समन्वय, मोहल्ला सभा के संविधान को परिभाषित करने के लिए मैपिंग, दिल्ली शहरी विकास प्राधिकरण (डूडा) के साथ मिलकर काम करना शामिल है।

उपमुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मिशन स्वराज की गवर्निंग काउंसिल का गठन होगा। मिशन स्वराज में आईटी और ई गवर्नेंस पोर्टल की मदद ली जाएगी। प्रभावशाली योजना और प्रबंधन के लिए ई गवर्नेंस टूल्स की मदद ली जाएगी। प्रोजेक्ट की मोहल्ला मैनेजमेंट सिस्टम(एमएमएस) के माध्यम से रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी।

दिल्ली कैबिनेट का तर्क है कि इस फैसले से नागरिकों की शक्ति बढ़ेगी। एक नोडल एजेंसी के तौर पर मिशन स्वराज भारत सरकार, दिल्ली सरकार, स्थानीय निकाय के बीच स्वराज मिशन के लिए काम करेगा। मिशन स्वराज मोहल्ला सभा की भूमिका और जिम्मेदारी को परिभाषित करेगा और जरूरत पड़ने पर अपडेट करेगा। जो योजनाएं मोहल्ला की तरफ से वोट करके तय की जाएंगी, उसके क्रियान्वयन की निगरानी भी स्वराज मिशन करेगा। कैबिनेट के फैसले में यह भी कहा गया है कि राजधानी की सामाजिक सेवाओं की प्रभावशाली तरीके से सेवा पूर्ति के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी और सामुदायिक स्वामित्व को बढ़ावा देने का काम भी स्वराज मिशन के तहत किया जाएगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें