लॉकडाउन के बाद डीटीसी बसों में 50 फीसदी सवारी ही यात्रा कर रही थीं लेकिन हाल ही में सरकार ने इस नियम में बदलाव करते हुए पूरी क्षमता के इस्तेमाल की अनुमति प्रदान कर दी है। वह भी तब जब दिल्ली में रोजाना सबसे ज्यादा संक्रमित मरीज सामने आ रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों को आशंका है कि कहीं ये बसें कोरोना वायरस के लिए सुपर स्प्रैडर का जरिया न बन जाएं।
दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने बसों में 50 फीसदी सवारी होने की अनिवार्यता को खत्म करने का फैसला लिया था लेकिन इसके ठीक तीन दिन बाद राजधानी में संक्रमित मरीजों की रिकॉर्ड संख्या सामने आने लगी। बीते मंगलवार और बुधवार को दिल्ली में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। इन दो दिन में 12 हजार से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक ओर सरकारें जहां कोरोना संबंधी सतर्कता नियमों का सख्ती से पालन करने पर जोर दे रही हैं। वहीं राष्ट्रीय राजधानी की बसों में सीमित सवारी न होने से स्थिति काफी गंभीर हो सकती है। यह स्थिति एक सुपर स्प्रैडर के रूप में कार्य कर सकती है, जो एकसाथ काफी ज्यादा लोगों को संक्रमित कर सकते हैं।
जोधपुर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पूर्व प्रो. रिजो एम जॉन का कहना है कि दिल्ली की बसों में सीमित सवारी पर रोक हटने और शादी समारोह में 200 लोगों की अनुमति देना फिलहाल जल्दबाजी से कम नहीं है। दिल्ली पूरे देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां कोरोना वायरस का तीसरा पीक देखने को मिल रहा है।
ऐसे में अगर भीड़ को नियंत्रण में नहीं लाया गया तो राजधानी के लिए यह काफी गंभीर चुनौती बन सकता है। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के दौरान दिल्ली में स्थिति एक जैसी ही थी। सभी जिले रेड जोन में थे। इसके बाद जून माह में काफी हद तक सुधार देखने को मिला लेकिन अभी स्थिति पहले से ज्यादा गंभीर है। मौत का आंकड़ा भी हर दिन बढ़ रहा है।