अहमद की मौत की खबर के बाद परिजन अस्पताल पहुंच गए। परिजन मांग कर रहे थे कि बना पोस्टमार्टम के ही अहमद का शव उनको दे दिया जाए। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी परिवार को समझाने में जुटे थे। उनका कहना था कि औपचारिता पूरी करने के बाद ही शव को परिवार के हवाले किया जाएगा। परवेज की मौसी खुर्शीद जहां ने रोते हुए बताया कि अब्दुल मतलूब का लगभग पूरा परिवार ही खत्म हो गया।
रोते हुए परवेज कहे जा रहा था कि उनका बेटा अहमद ज्यादातर अपने दादा-दादी के पास ही रहता था। शीजा भी अपने बच्चे को लेकर बेफिक्र रहती थी। हादसे के बाद सभी लोग अहमद के लिए दुआएं मांग रहे थे। रविवार को उसकी तबीयत में सुधार भी हुआ था, लेकिन शाम के समय अचानक तबीयत बिगड़ी और उसकी सांस थम गई।
माता-पिता, भाइयों और बहन का जनाजा देखकर फूट-फूटकर रो पड़े परवेज और नावेद...
पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही ईदगाह में सभी छह लोगों के शव पहुंचे तो नावेद और परवेज माता-पिता, भाइयों और बहन के शव देखकर फूट-फूटकर रोने लगे। एक ही परिवार के छह सदस्यों के शव और दोनों भाइयों को रोता देख पड़ोसी और रिश्तेदार के अलावा वहां जमा लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
अब्दुल मतलूब की बेटी आफिया उर्फ मोनी तो परिजनों के शव देखकर बेसुध हो गई। होश आने पर अपने मामा से लिपटकर रोने लगी। उसका कहना था शुक्रवार को ही तो अम्मी, बाजी और भाई उसके घर से लौटे थे। दिल्ली पहुंचकर उसने अपने परिजनों से वीडियो कॉल पर बात की थी। अगले दिन सुबह उसको यह मनहूस खबर मिली। मतलूब के दूर दराज से शायद ही कोई रिश्तेदार होगा जो दिल्ली उनके घर न पहुंचा हो। अस्र की नमाज के बाद जैसे ही छह जनाजे एकसाथ उठे तो नावेद, परवेज और आफिया बिलख पड़े। पड़ोसी और रिश्तेदारों ने किसी तरह उन्हें संभाला।
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