प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय ऊपरी मंजिल पर निर्माण कार्य जारी था। स्थानीय लोगों का कहना है कि इमारत में लगातार मंजिलें जोड़ी जा रही थीं और आसपास रहने वाले लोग भी इसकी जानकारी रखते थे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह निर्माण कार्य प्रशासन की नजरों से पूरी तरह ओझल था या फिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
दिल्ली में अवैध निर्माण और कमजोर इमारतों का मुद्दा नया नहीं है। कई भवन हादसों के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा। अप्रैल 2025 में मुस्तफाबाद में चार मंजिला इमारत गिरने के बाद भी एमसीडी ने माना था कि अवैध रूप से मंजिलें बढ़ाना और लोड-बेयरिंग क्षमता की अनदेखी करना बड़े खतरे की वजह बन रहा है। तब निगम ने पांच और छह मंजिला अवैध इमारतों की पहचान कर कार्रवाई का दावा किया था तथा अधिकारियों पर भी कार्रवाई की घोषणा की थी।
... तो निगरानी तंत्र क्या कर रहा था
सवाल है कि यदि चार मंजिला भवन को कुछ वर्षों में बढ़ाकर छह मंजिल और फिर सातवीं मंजिल तक ले जाया गया, तो क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर, भवन विभाग और निगरानी तंत्र क्या कर रहे थे। निर्माण सामग्री, मजदूरों की आवाजाही और लगातार चल रहे काम के बावजूद कोई रोक-टोक क्यों नहीं हुई। यदि समय रहते निरीक्षण और कार्रवाई की जाती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि बिना स्वीकृत नक्शे और संरचनात्मक जांच के अतिरिक्त मंजिलें जोड़ना जानलेवा साबित हो सकता है।
सातवीं मंजिल की छत डालने के दौरान हादसा
दक्षिण दिल्ली के साकेत के निकट सैदुल्लाजाब इलाके में शनिवार शाम अवैध छह मंजिला इमारत ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। हादसा उस वक्त हुआ जब सातवीं मंजिल की छत ढालने की तैयारी हो रही थी। वेस्टर्न मार्ग स्थित गली नंबर-5 में हुई इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई है और करीब 12 लोग घायल हैं। इनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है। सभी घायलों को मैक्स, एम्स और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राहत एवं बचाव अभियान देर रात तक युद्धस्तर पर जारी है। अभी भी कई लोगों के मलबे में दबे हैं।
अग्निशमन विभाग के अनुसार शाम 7.45 बजे इमारत ढहने की सूचना मिली थी। शुरुआती चरण में दमकल की चार गाड़ियां मौके पर भेजी गईं, लेकिन हादसे की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त दमकल वाहन और कर्मियों को भी तैनात किया गया। मौके पर एनडीआरएफ, दिल्ली पुलिस, दिल्ली नगर निगम तथा खोजी कुत्तों की टीमों को भी लगाया गया। अधिकारियों के अनुसार स्थानीय लोगों ने राहत दलों के पहुंचने से पहले तीन लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। भीड़ को नियंत्रित करने और बचाव कार्य में बाधा न आए इसके लिए पूरे इलाके को घेर लिया गया। सभी एजेंसियां समन्वय के साथ राहत एवं बचाव अभियान में जुटी रहीं।
सैदुल्लाजाब समेत चार गांवों की कमेटी के प्रधान रविंद्र सिंह ने बताया कि इमारत में विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। यहां कॉफी हाउस, कैफे, कोचिंग सेंटर, पीजी और कैंटीन चल रही थीं। उन्होंने बताया कि हादसे के समय कैंटीन में छात्र भोजन कर रहे थे, जिससे अधिक लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका बनी हुई है।