स्थानीय लोगों को जहां अब्दुल मतलूब के परिवार का हादसे के शिकार होने का गम था तो वह इस बात का शुक्र भी अदा कर रहे थे कि आंगनबाड़ी के समय इमारत नहीं गिरी। उनका कहना था कि रोजाना यहां 20 से 25 बच्चे पढ़ने के लिए जाते थे। इमारत गिरने के बाद से जहां स्थानीय लोग दुखी दिखे वहीं मासूम भी दहशत में थे।
Delhi Building Collapse
- फोटो : अमर उजाला
पड़ोसी जीशान ने बताया कि जावेद और परवेज उनके दोस्त हैं। उनके पिता अब्दुल मतलूब ने अपने ग्राउंड फ्लोर के हॉल को किराए पर आंगनबाड़ी को दिया हुआ था। यहां बच्चों को पढ़ाने के अलावा उनको मुफ्त में खाना-पीना भी दिया जाता था। इस वजह से मोहल्ले के कई छोटे-छोटे बच्चे वहां आते थे।
दिल्ली में चार मंजिला इमारत गिरी
- फोटो : जी पाल