दिल्ली सरकार आज (सोमवार) अभी तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने जा रही है। आम आदमी पार्टी की सरकार के संभावित 45 हजार करोड़ रुपये के बजट से दिल खोलकर वोट करने वाले आम आदमी को बड़ी उम्मीदें हैं।
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दिल्ली में निगम चुनाव व पंजाब के विधानसभा चुनाव को देखते हुए अरविंद केजरीवाल के आम आदमी की छवि को कायम रखते हुए बड़े खर्च के लिए बजट राशि जुटाने की चुनौती भी सरकार के सामने है।
आम आदमी पार्टी सरकार बड़े बजट को जुटाने की चुनौती के बीच संकेत दिए हैं कि कोई नया कर नहीं लगाने जा रहे हैं, उलट कुछ वस्तुओं पर वैट घटेगा। हालांकि पड़ोसी राज्यों में ब्रांडेड फूड ग्रेंस उत्पाद को वैट के दायरे में लाया जा सकता है।
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वजह है यहां उत्पादन नहीं होता है और पड़ोसी राज्यों में बैठकर व्यापारी इनमें कर चोरी करता है। कहा जा रहा है कि वैट कर जुटाने का सबसे बड़ा रास्ता है, ऐसे में पिछले वित्त वर्ष में 24 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा था। लेकिन 20 हजार करोड़ रुपये की वसूली हो सकी।
शिक्षा के बजट पर खर्च होगा बड़ा हिस्सा
केजरीवाल और मनीष सिसोदिया
ऐसे में सुधार के अलावा अधिक तामझाम के बिना रकम जुटाने का रास्ता भी सरकार को निकालना होगा। सूत्रों के अनुसार, पिछले बजट में घोषित योजनाओं के लिए सरकार इस साल भी राशि का प्रावधान करेगी।
पिछले साल की तरह इस साल भी शिक्षा पर बजट का बड़ा हिस्सा रखा जाएगा। वोकेशनल शिक्षा, शिक्षकों के प्रशिक्षण, पानी जांच लैब, मोहल्ला सभा, स्लम फ्री दिल्ली, अनधिकृत कॉलोनी में विकास कार्य के लिए बजट में विशेष प्रावधान की उम्मीद है।
केंद्र सरकार की स्पांसर स्कीम में दिल्ली को अधिक राशि मिलने, वित्त वर्ष 2015-16 में 5500 करोड़ रुपये की बचत, स्मॉल सेविंग स्कीम में मिली अधिक राशि से दिल्ली सरकार को राहत मिली है।
ये भी हैं उम्मीदें
पार्षदों के लिए प्रति बैठक की राशि बढ़ाए जाने की हो सकती है घोषणा।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में रखे जाने की एक लाख रुपये सालाना आय में बढ़ोतरी की हो सकती है घोषणा।
बुजुर्ग पेंशन की कैप बढ़ाने के अलावा उसे दिए जाने की प्रक्रिया में सुधार के आसार।
दिल्ली सरकार के ई ऑफिस में काम करने वालों को ड्यूटी आवर में एक घंटे छूट की उम्मीद।
वाईफाई, सीसीटीवी, बसों की खरीद, सम-विषम फार्मूले में वसूली गई राशि से साइकिल पर सब्सिडी की उम्मीद।
अस्पतालों में वीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए प्राइवेट वार्ड खत्म करने की प्रक्रिया हो सकती है शुरू।
स्कूलों में सीसीटीवी लगाए जाने के पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की हो सकती है घोषणा।
दिल्ली बजट आंकड़ों की कसौटी पर
2015-16 का बजट 41,129 करोड़ का था। जिसमें 19 हजार करोड़ रुपये योजना मद और 22,129 करोड़ गैर योजना में रखे गए थे।
कर से 34,661 करोड़ जुटाने का लक्ष्य था जो फरवरी तक 27020 करोड़ ही आए।
स्मॉल सेविंग से 1038 करोड़ आने थे जो फरवरी तक 1822 करोड़ आ चुके।
फरवरी, 2016 तक सरकार योजना मद के 19 हजार करोड़ रुपये में से सिर्फ 10.3 हजार करोड़ ही कर पाई है खर्च।
दिल्ली सरकार 2016-17 के बजट में योजना मद में 20.5 हजार करोड़ रुपये समेत 45 हजार करोड़ रुपये का कर सकती है प्रस्ताव।
बजट में 25 फीसदी शिक्षा की रहेगी हिस्सेदारी, दूसरे नंबर पर स्वास्थ्य व तीसरे नंबर पर परिवहन को तवज्जो।
वोकेशनल शिक्षा, शिक्षकों के प्रशिक्षण, पानी जांच लैब, मोहल्ला सभा, स्लम फ्री दिल्ली, अनाधिकृत कालोनी में विकास कार्य के लिए बजट में विशेष प्रावधान की उम्मीद।
विज्ञापन बजट में सरकार करेगी कटौती, 526 करोड़ रुपये आधी राशि भी नहीं कर सकी खर्च।
देशभर में सबसे कम वैट दर के बीच 45 हजार करोड़ रुपये जुटाने की चुनौती।
पार्टी के चुनावी घोषणाओं को मूर्त रूप देने की कोशिश व प्रावधान को आगे बढ़ाना।
मूल सुविधाओं के साथ चकाचौंध वाले एलिवेटेड बीआरटी, मेट्रो फेज-चार, साफ सुथरी यमुना के प्रोजेक्ट पर काम शुरू करना।
दिल्ली विधानसभा से पास बिलों को केंद्र सरकार में रुकने को लेकर कैबिनेट के फैसलों को जमीन पर उतारना।
पैसे के प्रावधान के बावजूद बसों की खरीद, बिना वैट दर बढ़ाए वसूली बढ़ाना।
बिजली पर सब्सिडी और फ्री पानी कायम रखना।
संसदीय सचिवों से बिना सुविधा दिए काम कराना, विधायकों के वेतन नहीं बढ़ने की दिक्कत दूर करना।