आम आदमी पार्टी अपना पहला बजट यादगार बनाना चाहती है। राजस्व वसूली में पिछड़ने के बावजूद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया 40.5 हजार करोड़ रुपये का बजट बृहस्पतिवार को पेश करेंगे। पिछला बजट 36,766 करोड़ रुपये का था। जहां फ्लाईओवर और मेट्रो पर सबसे अधिक खर्च करने वाली सरकार इस बार शिक्षा पर ध्यान दे रही है।
बंपर बहुमत से चुनकर आई सरकार 70 प्वाइंट पर वादे करके आई है तो जनता की उम्मीद भी ढेर हैं। यही वजह है कि सरकार पर उंगली न उठे इसलिए योजना मद भी 16.7 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 19 हजार करोड़ रुपये किया जा सकता है।
वर्ष 2014-15 के बजट में जो राशि रखी गई थी वह खर्च नहीं हो पाई थी तो उसे संशोधित बजट में घटाकर 15,450 करोड़ रुपये किया गया था। वहीं गैर योजना मद की 19,066 करोड़ रुपये को बढ़ाकर 21.5 करोड़ रुपये करने की तैयारी है।
25 हजार करोड़ वसूली का लक्ष्य
मॉडल स्कूल, नए स्कूल भवन, संसाधनों के लिए दोगुना बजट करने की तैयारी है तो स्वास्थ्य पर भी ज्यादा खर्च होगा। महिला सुरक्षा के लिए सीसीटीवी, बसों में मार्शल की नियुक्ति होगी। हालांकि खर्च के मामले में अभी भी दिल्ली मेट्रो के साथ परिवहन तीसरे नंबर पर होगा।
पिछले बजट में शिक्षा पर 2344 करोड़ रुपये रखा गया था जो बजट का 16 फीसदी था और स्वास्थ्य पर 1990 करोड़ रुपये रखे गए थे जो 15 फीसदी था।
बजट में मोटा खर्च होगा तो वसूली के नए रिकार्ड टारगेट भी फिक्स किए गए हैं। अकेले वैट पर 25 हजार करोड़ वसूली का लक्ष्य है, जबकि पिछली बार 20 हजार करोड़ भी पूरे नहीं कर पाए थे। तो राजस्व विभाग और परिवहन विभाग का भी राजस्व वसूली लक्ष्य बढ़ाया गया है। कारण साफ है कि केन्द्र शासित राज्य होने के कारण घाटे का बजट पेश नहीं किया जा सकता।
योजना राशि बढ़ाने का अनुमान
सूत्र बताते हैं कि एमसीडी को लोन के तौर पर मांगी गई कोई राशि नहीं मिलने जा रही है। हालांकि लोन वसूली नहीं करेंगे। इसी तरह से परिवहन विभाग में वसूली बढ़ाने के लिए डीजल वाहनों पर टैक्स दायरा बढ़ाने के अलावा कुछ कॉमर्शियल वाहनों पर शुल्क लगाया जा सकता है।
वहीं वैट वसूली को लेकर यह बताई जा रही है कि कई ऐसे रास्ते ढूंढे गए हैं जो वैट दायरे से बाहर थे। हालांकि आबकारी नीति को लेकर पहले ही कहा जा चुका है कि इस बार टैक्स नहीं बढ़ेगा।
लेखानुदान में 2015-16 का जो बजट पेश किया गया था उसमें योजनामद में 15,350 करोड़ रुपये समेत 37,750 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। गैर योजना मत में बड़ी राशि बिजली सब्सिडी, फ्री पानी, केन्द्र सरकार को लोन व उसके ब्याज की राशि लौटाने में खर्च होती है।