पुस्तक प्रेमियों के लिए शनिवार को प्रगति मैदान में 23वें दिल्ली पुस्तक मेले का आगाज हुआ। मेले का उद्घाटन आईटीपीओ (इंटरनेशनल ट्रेड प्रमोशन आर्गेनाइजेशन) के कार्यकारी निदेशक दीपक कुमार और फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स (एफआईपी) के पदाधिकारियों ने किया। पुस्तक मेले का थीम पढ़ेगा भारत, बढ़ेगा भारत है। 3 सितंबर तक चलने वाले इस मेले में 290 से अधिक प्रकाशकों ने भागीदारी की है। हालांकि बीते साल 375 प्रकाशकों की तुलना में यह संख्या घटी है। पुस्तक मेले का आकार भी छोटा हो गया है।
उद्घाटन मौके पर प्रकाशकों ने इस पर चिंता जताई। इसके लिए जीएसटी, ई-बुक्स समेत स्कूल में निजी प्रकाशकों की भागीदारी कम करने को एक बड़ी वजह बताई। दीपक कुमार ने कहा कि पुस्तक मेले के आयोजन से पढ़ने के शौकीनों को एक ही जगह सभी किताबें उपलब्ध होती है। पढ़ने की आदत कभी छोड़नी नहीं चाहिए।
एफआईपी के पूर्व अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने कहा कि प्रकाशकों पर रॉयल्टी पर 18 फीसदी जीएसटी का बोझ बढ़ा है। निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों पर सरकार का जोर देने से स्कूल की किताब प्रकाशित करने वाले प्रकाशक प्रभावित हुए है। इसका असर किताबों के दाम के साथ उस पर
मिलने वाले छूट पर पड़ रहा है।
पुस्तक मेला हॉल नंबर 8 से 12 तक लगा है। हॉल नंबर 12 में स्टेशनरी मेला लगा है, तो बाकी हॉल में किताब के प्रकाशकों का स्टाल है। मेले में बच्चों के एजुकेशन सी जुड़ी किताबें, धार्मिक किताबें भी बड़ी संख्या में उपलब्ध है। मेले के पहले दिन 10 पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। इस बार स्कूल से लेकर कॉलेज तक के स्टूडेंट को आईकार्ड दिखाने पर मुफ्त प्रवेश है। वैसे 30 रुपये का टिकट लिया जा रहा है।
यह टिकट आईटीपीओ की वेबसाइट पर ऑनलाइन भी उपलब्ध है। एफआईपी से जुड़े प्रदीप छाबड़ा ने बताया कि पहले दिन वीकेंड होने के बाद भी भीड़ कम है। इसका एक कारण पहला दिन होने के साथ दिल्ली में धारा 144 लागू होना है। उम्मीद है कि रविवार को पुस्तक प्रेमी बड़ी संख्या में आएंगे।