फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सतीश उपाध्याय ने भाजपा कार्यकारिणी में किया बड़ा खेल

विज्ञापन
विज्ञापन
नगर निगम की राजनीति से सीधे प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी पर पहुंचे सतीश उपाध्याय व उनके करीबी अपनी नियुक्ति के साथ की कार्यकारिणी के गठन में जुटे हुए थे लेकिन सूची जारी होने में महीनों लग गए और वह जारी भी हुई तो रात के करीब एक बजे।
विज्ञापन


इस सूची में उपाध्याय के पावर गेम अपने हाथ में रखने की कवायद दिख रही है। कार्यकारिणी की सूची में भाजपा विधायकों व सांसदों का किनारे कर दिया गया है जबकि पार्षदों, नगर निगम की राजनीति करने वाले व हारे उम्मीदवारों की सूची में बड़ी संख्या है। इसके अलावा भी इस बार की सूची में कई नए प्रयोग किए गए हैं।

लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेशाध्यक्ष के रूप में सतीश उपाध्याय की नियुक्ति के समय से डॉ. हर्षवर्धन के प्रदेश नेतृत्व के भी पहले की कार्यकारिणी चली आ रही थी। ऐसे में दोनों अध्यक्षों के कार्यकाल में पिछले करीब आठ माह से नई कार्यकारिणी के गठन को लेकर बार-बार चर्चाएं हो रही थीं। अब सूची जारी हुई तो पता चला कि कई नए प्रयोग इस बार टीम सतीश के गठन में किए गए हैं।
विज्ञापन


इसी सूची में विधायकों को खास स्थान नहीं मिल सका है जबकि दिल्ली से सभी सात सीटों पर भाजपा के सांसद जीतने के बावजूद सिर्फ रमेश विधूड़ी को महामंत्री पद मिला है, हालांकि यह पिछली कार्यकारिणी में भी महामंत्री थे। पिछली कार्यकारिणी में करीब आधा दर्जन विधायकों को स्थान मिलने के अलावा अन्य विधायकों व बड़े नेताओं को स्थायी आमंत्रित सदस्य या विशेष आमंत्रित सदस्य में स्थान दिया गया था।
विज्ञापन

हारे हुए मोहरों पर लगाया दबाव

इस बार कार्यकारिणी में इन विशेष व स्थाई सदस्यों का खाता ही नहीं है। पहली बार गठित नगर निगम संयोजक के रूप में तीन विधायकों सुभाष, कुलवंत राणा व मनोज शौकीन को स्थान दिया गया है। दरअसल, विधायक कार्यकारिणी में स्थान पाने को इसलिए भी लालायित रहते हैं क्योंकि सरकार बनने की दशा में उनका दावा मुख्यमंत्री या मंत्री पद के लिए कार्यकारिणी की पैरवी से मजबूत हो जाता है।

जबकि इस कार्यकारिणी में तीन पार्षदों को पदाधिकारी बनाया गया है। जयप्रकाश व शिखा राय पिछली कार्यकारिणी में महामंत्री थे लेकिन उन्हें इस बार उपाध्यक्ष बनाया गया है। कुछ एक नामों को छोड़ दें तो इस कार्यकारिणी में प्रभावशाली या बड़े नेताओं का टोटा है।

इसके अलावा नए प्रयोग के तहत कार्यकारिणी सदस्य, विशेष आमंत्रित सदस्य व स्थायी आमंत्रित सदस्यों की लंबी सूची इस बार खत्म कर दी गई है तो मोदी विजन का ध्यान रखते हुए स्वच्छता अभियान सहित नगर निगम संयोजक, अनुशासन समिति, आजीवन सहयोग निधि, प्रशिक्षण प्रभारी, संयोजन बूथ प्रबंधन टीम का गठन भी पहली बार किया गया है।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के कुछ एक चहेतों को इस सूची में जरूर स्थान मिला है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दिल्ली की राजनीति व सत्ता में इस समय पर भाजपा मुख्य भूमिका निभा रही है, ऐसे में पावर गेम अपने पास रखने के लिए कार्यकारिणी में कई तिकड़म लगाई गई है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें