दिल्ली गैस चैंबर बनती जा रही है और अब यह रहने लायक नहीं है। धूल के इस गुब्बार से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। यदि दिन-प्रतिदिन स्थिति खराब होती रही तो आने वाली पीढ़ी बीमार पैदा होगी।
यह कहना है आम लोगों का, जो इस धूल से लगातार परेशान हो रहे हैं। हर कोई धूल के कणों से जूझ रहा है ऐसे में बारिश से राहत की उम्मीदें लगा रहे हैं।
सुमित दीक्षित का कहना है कि हिमाचल से दिल्ली आया हूं। बीते दो दिनों से सांस लेने में तकलीफ हो रही है। ऐसी आबोहवा रास नहीं आ रही है। जल्द ही यहां से वापस जा रहा हूं। ऐसी हालत दिल्ली की पहले देखी नहीं।
लक्ष्मीनगर निवासी एक निजी कंपनी में कार्यरत बलवंत त्रिपाठी का कहना है कि बीते दो दिनों से उन्हें कार्यालय आने-जाने में सांस लेने में दिक्कत हो रही है। धूल से बचने के लिए जो मॉस्क वह इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे उन्हें कोई फायदा नहीं हो रहा है।