इससे पहले सदन की बैठक दोबारा शुरू होने पर विधानसभा उपाध्यक्ष के इस मुद्दे पर चर्चा कराने के निर्णय को विपक्ष ने चुनौती दी। विधानसभा उपाध्यक्ष और सत्तापक्ष के सदस्यों ने चर्चा कराने के निर्णय को सही ठहराया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक तर्क-वितर्क हुआ। विपक्षी सदस्यों के शांत नहीं होने पर विधानसभा उपाध्यक्ष ने उनको मार्शलों के माध्यम से बाहर निकलवा दिया।
इसके बाद चर्चा आरंभ करते हुए आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली के सभी सातों लोकसभा सांसदों व भाजपा के सभी आठ विधायकों की ओर से लिखे गए तमाम पत्रों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने भी लोगों के तबादले और नियुक्ति करने संबंधी पत्र लिखे होंगे। लिहाजा आप विधायकों की तरह उनके खिलाफ भी कार्रवाई की पहल होनी चाहिए, क्योंकि सभी जनप्रतिनिधि आम लोगों की मदद के लिए पत्र लिखते है, लेकिन आप विधायकों को बदनाम किया जा रहा है।
वहीं आप विधायक संजीव झा, कुलदीप सिंह, ऋतुराज, विशेष रवि ने कहा कि वह जनता की भलाई के लिए इस तरह के पत्र लिखने का अपराध बार-बार करेंगे। उधर भाजपा विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने भी जनता की समस्या दूर कराने के लिए पत्र लिखने का समर्थन किया।