इस बार की तरह 2015 के दिल्ली विधानसभा में भी बेशक अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी (आप) का सबसे लोकप्रिय चेहरा रहे हों, लेकिन पांच साल पहले 70 में से 67 सीटें जीतकर रिकॉर्ड कायम करने वाली पार्टी में पर्दे के पीछे दूसरे कई नेताओं ने भी अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन बीते पांच साल में इनमें से कई नेताओं ने आप को अलविदा कह दिया है। पार्टी भी बहुत आगे बढ़ गई है। फिर भी, आप के लिए बेहद संजीदा इस चुनाव में चुनौती पुराने प्रदर्शन को दोहराने की है।
योगेंद्र यादव
2015 : अमूमन विपक्ष के हमलावर होने पर पार्टी का पक्ष रखते थे। सर्वे से दिल्ली की नब्ज पर नजर थी। चुनावी रणनीति तैयार करने का जिम्मा था।
2020 : चुनाव जीतने के बाद पार्टी छोड़ दी। स्वराज इंडिया नाम की पार्टी बनाई। हरियाणा विधानसभा चुनाव लड़ा। किसानों के मसलों पर रैलियां कीं। फिलहाल एनआरसी व सीएए के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन में छात्रों के साथ खड़े हैं।
कुमार विश्वास
2015 : स्टार चुनाव प्रचारक। अरविंद केजरीवाल के बाद सबसे ज्यादा रैलियां इन्होंने ही की थी।
2020 : आप की राजनीतिक मामलों की समिति में अभी भी नाम है, लेकिन विधायक अमानतुल्लाह खान की तरफ से लगाए गए आरोप के बाद बगावती मुद्रा में हैं। मौके-बेमौके वह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर तीखा तंज कसते हैं। अपने चुटीले अंदाज से फिलहाल युवाओं के पसंदीदा कवि हैं।
प्रशांत भूषण
2015 : कानून पर बारीक नजर रखने वाले वरिष्ठ वकील ने आप को अदालती दांव-पेंच से बचाया। बेदाग उम्मीदवारों के चयन पर बारीक नजर थी।
2020 : चुनाव जीतने के बाद पार्टी छोड़ दी। नए संगठन स्वराज अभियान से जुड़ गए। फिलहाल उनका ज्यादातर वक्त अदालती मामलों में बीतता है। वहीं, केंद्र सरकार के प्रति आलोचनात्मक रुख अमूमन जाहिर करते रहते हैं।
आशुतोष
2015 : मीडिया जगत को अलविदा कह राजनीति में शामिल हुए। चुनावी रणनीति तैयार करने के साथ मीडिया प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई।
2020 : अंदरूनी वजहों से 2018 में पार्टी छोड़ दी। दोबारा मीडिया में लौटे। बीच-बीच में अपने लेखों से आप पर आलोचनात्मक राय जाहिर करते रहते हैं।
आशीष खेतान
2015 : इनके स्टिंग ऑपरेशन से आप ने कई बड़े खुलासे किए थे। विपक्ष पर हमलावर होने की पर्याप्त सामग्री इनसे मिली थी। चुनावी रणनीति तैयार करने में भी भूमिका अहम रही।
2020 : निजी वजहों से 2018 में पार्टी छोड़ दी। राजनीति की जगह खुद को लीगल प्रेक्टिस में जोड़ लिया। फिलहाल चर्चा में नहीं है।
मुनीष रायजादा
2015 : अमेरिकी एनआरआई ने फॉरेन फंडिंग में अहम भूमिका निभाई थी। वहीं, पार्टी की एनआरआई विंग का संयोजन भी किया था।
2020 : पार्टी पर अपने मूल मकसद से हट जाने का आरोप लगाते हुए 2017 में राजनीति से अलविदा कह दिया। पंजाब विधानसभा चुनाव में आप के खिलाफ अभियान चलाया। फिलहाल एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘पारदर्शिता’ को लेकर चर्चा में हैं।