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कैसे बनते हैं एग्जिट पोल्स के आंकड़े, नतीजों के कितना करीब रहने की होती है संभावना?

Mon, 10 Feb 2020 12:16 PM IST
प्राची प्रियम चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एग्जिट पोल - फोटो : Amar Ujala
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दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों का पूरे देश को इंतजार है। 8 फरवरी को दिल्ली की सभी 70 सीटों पर मतदान संपन्न हुए। अब कल यानी मंगलवार को नतीजे आने हैं। इससे पहले तमाम एग्जिट पोल्स आने शुरू हो गए, जिनके जरिए नतीजों का आकलन किया जा रहा है। लगभग सभी एग्जिट पोल्स के नतीजे एक-दूसरे से मेल खा रहे हैं। अनुमानित नतीजों के आधार पर नेताओं के बीच जंग भी छिड़ी हुई है। हम आपको बता रहे हैं कि क्या होता है एग्जिट पोल, इसका सर्वे कैसे किया जाता है और किस हद तक सही साबित होते हैं इनके अनुमान।

क्या होता है एग्जिट पोल?

एग्जिट पोल मतदान वाले दिन मतदाताओं का पक्ष जानने के लिए किया जाने वाला एक छोटा सर्वे होता है। वोट डालने के बाद मतदाता जब बाहर निकलता है, तो उससे कुछ सवाल पूछे जाते हैं और उसके टटोलने की कोशिश की जाती है। जिससे ये पता लग सके कि वोटर किस दल को या किस प्रत्याशी को अपना कीमती वोट देकर आ रहा है।

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बूथ से जुटाए गए इन आंकड़ों का विश्लेषण कर चुनाव खत्म होने के बाद शाम को एग्जिट पोल दिखाया जाता है। अगर मतदान कई चरणों में हो रहा होता है, तो आखिरी दौर की वोटिंग खत्म होने के बाद ही एग्जिट पोल दिखाए जा सकते हैं।

चुनाव खत्म होने के बाद ही क्यों दिखाया जाता है एग्जिट पोल?

चुनाव समाप्त होने के बाद एग्जिट पोल इसलिए दिखाए जाते हैं, ताकि मतदाताओं के उपर किसी भी तरह का मनसिक दबाव नहीं बन पाए। जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 126 ए के मुताबिक मतदान के दौरान ऐसी कोई भी चीज नहीं होनी चाहिए जो वोटरों पर मनोवैज्ञानिक असर डाले या उनके वोट देने के फैसले को प्रभावित करे। इसलिए ये तभी प्रसारित होता है जब सभी दौर का मतदान संपन्न हो चुका होता है।

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क्या हमेशा सच होते हैं एग्जिट पोल?

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि एग्जिट पोल हमेशा सही साबित होते हैं। कई बार ये गलत भी हुए हैं, जिसकी एक मुख्य वजह है वोटिंग के दिन इकट्ठा किया जाने वाला डाटा। मतदान के दिन जब कोई एक वोटर से बात कर रहा होता है, उस बीच कई वोटरों की राय शामिल नहीं हो पाती है। जिसकी वजह से कई बार एग्जिट पोल गलत भी साबित होते हैं।

इसके अलावा यह भी एक कारण है कि मतदान तो लाखों-करोड़ों लोग करते हैं, लेकिन एग्जिट पोल्स के लिए महज कुछ हजार वोटरों की राय लेकर आंकड़े तैयार किए जाते हैं। ऐसे में सटीक अनुमान लगा पाना मुश्किल हो जाता है।

कब शुरु हुआ एग्जिट पोल?

माना जाता है कि एग्जिट पोल की शुरुआत साल 1967 में हुई थी। नीदरलैंड के एक समाजशास्त्री और पूर्व राजनीतिज्ञ मार्सेल वान डेन अपने देश के चुनाव के दौरान एग्जिट पोल किया था। हालांकि ये भी कहा जाता है इसी साल अमेरिका में एक राज्य के चुनाव के दौरान पहली बार एग्जिट पोल किया गया था।
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