फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली में मिल रही मुफ्त सेवाओं से पड़ोसियों को होती है जलन, पढ़ें- तीन आम लोगों की गर्म चर्चा

Thu, 09 Jan 2020 07:36 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

सुबह करीब 9.30 बजे का वक्त था। हल्की बारिश के बीच रामकृष्ण आश्रम मेट्रो स्टेशन की तरफ ई-रिक्शा दौड़ रहा था। पिछली सीट फुल थी। चारों मुसाफिरों को अपने दफ्तर पहुंचने की जल्दी थी। अमूमन कार से दफ्तर जाने वाले सुरेंद्र सिन्हा ने अपना दर्द साझा करने की गरज से बात छेड़ते हुए कहा कि बारिश व जाम से बचने के लिए मेट्रो पकड़नी पड़ रही है। लग रहा है कि आज चाणक्यपुरी पहुंचने में देर हो जाएगी। 

विज्ञापन


दूसरे मुसाफिर आरएन शर्मा ने जवाब देते हुए कहा ‘ हमें लगता है कि दिल्ली का जाम तभी खत्म होगा, जब मेट्रो सस्ती होगी। कभी बारिश तो कभी वीआईपी रूट लगने से डायवर्जन। यह तो साल भर की बात है’। इस पर सिन्हा साहब बोले। हां, वो तो है। लेकिन क्या-क्या सस्ता होगा? बिजली, पानी...। पैसा तो हमारी-आपकी ही जेब से जा रहा ना? ‘तब भी, मैनेज तो कर ही रहा है ना, केजरीवाल (मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल) ? सब खुश भी हैं।’ बारी अब तीसरे मुसाफिर अमर सिंह की थी।

‘सब फ्री ले लें, अपनी जेब कटवाकर। बताइए, पहले दिल्ली में पेट्रोल सस्ता होता है। और आज दिल्ली में महंगा। कहीं से लेकर कहीं दे रहा है।' सिन्हा साहब अपनी बात पर अड़े रहे।
विज्ञापन


‘फिर भी, यूपी वाले से तो ठीक है। बताओ, बिजली कितनी महंगी हो गई है। निजी स्कूल न हों तो वहां बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो जाए।' चौथे मुसाफिर धीरेंद्र शाही ने काफी देर बाद चुप्पी तोड़ी।

‘पेट्रोल की क्या बात करते हैं। अमेरिका-ईरान में तनाव बढ़ने से इसमें वैसे ही आग लगने वाली है। इसमें केजरीवाल क्या करेगा?’ आरएन शर्मा ने सवाल किया।

‘करेगा क्या, टैक्स कम करके सस्ता तो कर ही सकता है।  लेकिन वो (अरविंद केजरीवाल) करेगा नहीं। क्योंकि उसे मुफ्त में रेवड़ी जो बांटनी है’ सिन्हा साहब बोल पड़े।

‘चलिए, अब चुनाव हो ही रहा है। जिसको जो पसंद होगा, उसको वो वोट देगा ही। लेकिन दिल्लीवालों को मिल रही मुफ्त सुविधाओं को देखकर पड़ोसी राज्यों में रह रहे रिश्तेदारों को जलन होती है’। हंसते हुए धीरेंद्र शाही ने अपने मन की बात कह डाली।
विज्ञापन


तब तक ई-रिक्शा छोड़ मेट्रो पकड़ने की बारी आ गई थी। और चारों ने प्लेटफार्म की तरफ जाती सीढ़ियों की तरफ पैर बढ़ा दिए।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें