पहली बार बड़े पैमाने पर दलबदलू नेताओं को टिकट देने के पीछे आम आदमी पार्टी (आप) की दलील है कि सीट पर सुनिश्चित जीत तय करने के लिए यह कदम उठाया गया है। विधायकों का टिकट काटने के बाद पार्टी अपने किसी अनाम चेहरे का टिकट देकर सीट फंसाना नहीं चाहती थी।
एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि चुनाव की तारीख घोषित होने के साथ ही आप ने अपने सभी विधायकों के बीच पांच के कामकाज का सर्वे कराया। इसमें से 15 विधायकों को कामकाज खराब होने के साथ इनकी अपने इलाके में पकड़ भी मजबूत नहीं थी। फिर, आम लोगों में विधायकों से नाराजगी भी थी। इसके आधार पर पार्टी ने इनका टिकट काटने का फैसला लिया था।
इनकी जगह पार्टी को ऐसे उम्मीदवारों की तलाश थी, जो आप की जीत की राह आसान कर सकें। इसमें कांग्रेस के दिग्गज नेता बेहतर थे। पार्टी का मानना है कि इन नेताओं की अपने इलाके में निजी स्तर पर मजबूत पकड़ है। पूर्व कांग्रेसी विधायकों की अपने जनाधार के साथ आप का वोट मिल जाने से सीट जीतना पक्का रहेगा। इसी रणनीति के तहत पार्टी इनको टिकट दिया है।