सुबह के करीब साढ़े सात बजे रहे थे। शाहीन बाग के शाहीन पब्लिक स्कूल के बाहर मतदाताओं की भीड़ जुटने लगी थी। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा बलों ने भी समय से पहले वोट डालने आए लोगों को मतदान केंद्र से कुछ दूर ही रोक दिया। आठ बजते ही वोटरों को मतदान केंद्र में प्रवेश दिया गया।
देखते ही देखते पोलिंग बूथों पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं। कमोबेश, यही हाल शाहीन बाग के मौलाना अबुल कलाम आजाद स्कूल और ओखला मॉर्डन पब्लिक स्कूल शाहीन बाग का भी था। दिन चढ़ने के साथ मतदान केंद्रों पर लोगों की भीड़ जुटती चली गई। स्थानीय लोगों का कहना था कि मताधिकार ही उनकी ताकत है। सीएए और एनआरसी लाकर मौजूदा सरकार साजिश के तहत उन्हें अधिकारों से वंचित करना चाहती है।
शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी को लेकर पहले दिन से विरोध प्रदर्शन कर रही दादी सरवरी ने बताया कि दिन निकलते ही वह वोट डालने के लिए तैयार हो गई थीं। उनका वोट मौलाना अबुल कलाम आजाद स्कूल में था। करीब सवा सात बजे वह वहां पहुंच गई, लेकिन वहां जाकर पता चला कि वोटिंग आठ बजे से शुरू होगी। इंतजार के बाद आठ बजे उन्होंने वोट डाला।
जामिया के एजुकेशन डिपार्टमेंट में प्रोफेसर जसीम अहमद ने बताया कि वह ओखला मॉर्डन स्कूल में सुबह से लाइन में लगे थे। दो घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी उनका नंबर नहीं आ पाया। शाहीन पब्लिक स्कूल में एक ओर महिलाओं और दूसरी ओर पुरुषों की करीब पांच-पांच सौ मीटर लंबी लाइन थीं।
ओखला विधानसभा में एमसी स्कूल अबुल फजल, यूपी प्रोजेक्ट स्कूल, एमसी स्कूल ओखला, बटला हाउस, सेंट गिरी स्कूल, जामिया मिडिल स्कूल और जामिया यूनिवर्सिटी कैंपस के मतदान केंद्रों में भी यही हालत थी।