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Delhi Riots: पांच मामलों में एक जैसी एफआईआर, विधानसभा समिति ने जताया संदेह

Tue, 22 Sep 2020 11:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली     
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दिल्ली दंगा फाइल फोटो - फोटो : जी पॉल
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दिल्ली विधान सभा की अल्पसंख्यक कल्याण समिति ने दिल्ली दंगा मामले में दिल्ली पुलिस से सहयोग न मिलने पर सख्त एतराज जताया है। कमेटी का आरोप है कि लगातार मांग के बावजूद दिल्ली पुलिस ने अभी तक दंगों में दर्ज एफआईआर की कापी उपलब्ध नहीं कराई है। दूसरी तरफ दयालपुर थाना क्षेत्र में एक के बाद एक दर्ज पांच एफआईआर की विषयवस्तु एक होने पर समिति ने संदेह जाहिर किया है। सभी मामले कट्टा रखने के आरोप में दर्ज हैं। वहीं, दिल्ली सरकार ने इस मामले में उपयुक्त कदम उठाने का भरोसा कमेटी का दिया है।

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इससे पहले बुधवार को समिति के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमे सीलमपुर से विधायक अब्दुर्रहमान, मुस्तफाबाद से विधायक हाजी यूनुस, विधायक जरनैल सिंह विशेष तौर पर मौजूद रहे। वहीं, समिति ने उत्तर पूर्वी और शाहदरा जिले के जिला मजिस्ट्रेट, दोनों जिलों के सभी उप जिला अधिकारी, गृह सचिव और राजस्व विभाग के डिवीजनल कमिश्नर को तलब किया गया था। बैठक में दिल्ली दंगा मामले में विस्तार से चर्चा हुई।

इससे पहले की बैठकों में कमेटी ने दिल्ली दंगों में दर्ज करीब 750 एफआईआर की कापी पुलिस से मांगी थी। इसमें से दयालपुर थाने में दर्ज सिर्फ पांच एफआईआर अभी तक कमेटी को मिल सकी हैं। पांचों मामलों को कमेटी संदिग्ध मान रही है। कमेटी के मुताबिक, सभी मामलों के विषयवस्तु एक है, सिर्फ आरोपियों के नाम बदल दिए गए हैं। 
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कमेटी के एक सदस्य ने बताया कि पुलिस की एफआई में इनकी पहचान फैज अहमद (30), अतहर (23), सोहिब (22), शाहरुख (22) और फैजान (28) के रूप में हुई है। सभी को देशी कट्टों के साथ गिरफ्त में आया बताया गया है। एफआईआर में कहा गया है कि संदिग्ध दिख रहे पांचों युवक पुलिसकर्मियों को देखकर वे दूसरी तरफ मुड़ गए और तेज भागने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने जब उन्हें पकड़ा तो उनकी दायीं जेब से देशी कट्टा बरामद हुआ। कमेटी ने गृह सचिव को इस मामले में दखल देते हुए दिल्ली पुलिस से बात करने को कहा गया है। दिल्ली सरकार ने इस संबंध में उचित कदम उठाने का भरोसा दिया है।

दूसरी तरफ कमेटी ने अन्य मामलों की एफआईआर न मिलने पर सख्त एतराज जताया है। गृह विभाग के आला अधिकारियों को कमेटी ने निर्देश दिया है कि वह इस मामले में दिल्ली पुलिस से स्पष्टीकरण मांगे। पुलिस दंगे की एफआई उपलब्ध कराने से बच क्यों रही है, जबकि जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है की एफआईआर की कापी सार्वजनिक होनी चाहिए।

मामला दर्ज न होने वाली पीड़ितों से भी मुलाकात
कमेटी में दंगा पीड़ितों को मिले मुआवजे पर भी चर्चा की। इसमें तीन ऐसे दंगा पीड़ितों को भी पेश किया गया जिनमें दो महिलाओं का घर लूट लिया गया था जबकि एक के भाई की दंगे में मृत्यु हो गई थी। लेकिन पुलिस ने आज तक एफआईआर नहीं लिखी। इस पर कार्रवाई के आदेश कमेटी ने दिए हैं।

मुआवजे पर भी हुई चर्चा
बैठक में दंगा पीड़ितों को मिले मुआवजे पर भी चर्चा हुई। इसमें कई ऐसे मामले हैं, जिसमें बहुत सारी कमियां पाई गई। जिनमें आठ से दस लाख रुपये का नुकसान हुआ है, उसमें महज बीस से तीस जहार मुआवजा दिया गया है। जबकि एक केस ऐसा भी आया जिसमे नुकसान मात्र 90  हजार का है और मुआवजा आठ लाख दे दिया गया है। कमेटी के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने ऐसे सभी केसों पर पुन: विचार के आदेश दिए। 

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