वहीं, आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा बजट सत्र के पहले दिन सदन से बायकॉट किया है, विपक्ष के चार विधायकों को पिछले शीतकालीन सत्र से निष्कासन बरकरार रखने पर आम आदमी पार्टी के सभी विधायकों ने विरोध किया है। सदन में अनुपस्थित हैं। पिछले विधानसभा सत्र में भी पहले दिन के बाद विपक्षी पार्टी आम आदमी पार्टी सदन से गायब रही थी। 5 जनवरी 2026 को दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन उपराज्यपाल वीके सक्सेना के अभिभाषण में बाधा डालने और हंगामा करने के आरोप में आम आदमी पार्टी के चार विधायकों संजीव झा, कुलदीप कुमार, सोमदत्त और जरनैल सिंह को सदन से मार्शल आउट और निलंबित कर दिया गया था।
विपक्ष की आवाज दबाने के अलावा कोई काम नहीं: आतिशी
वहीं, बजट सत्र के दौरान विधानसभा के बाहर आम आदमी का प्रदर्शन जारी है। दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता और आप विधायक आतिशी ने कहा, 'विधानसभा के सत्र में पक्ष और विपक्ष दोनों की भूमिका होती है। विपक्ष की भूमिका होती है सरकार को जनहित के मुद्दों के बारे में बताना लेकिन भाजपा ने पिछले 1 साल में विपक्ष की आवाज दबाने के अलावा कोई काम नहीं किया। यह कैसा लोकतंत्र है। वे विधानसभा का सत्र क्यों बुला रहे हैं, जब विपक्ष को बोलने का मौका ही नहीं दिया जाता है।"
बजट से पहले सरकार के बड़े संकेत
दिल्ली का बजट आने से पहले सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं के साफ संकेत दे दिए हैं। इस बार महिलाओं के स्वास्थ्य, प्रदूषण नियंत्रण और आधुनिक परिवहन पर खास जोर रहने वाला है, जिससे आम लोगों को सीधे असर देखने को मिल सकता है। दिल्ली में बजट से पहले सरकार की तैयारियों और संकेतों ने लोगों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। इस बार का बजट महिलाओं के स्वास्थ्य, बेहतर इलाज, प्रदूषण नियंत्रण और ई-परिवहन जैसे अहम मुद्दों पर केंद्रित रहने की संभावना है। सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, बजट का एक बड़ा हिस्सा महिलाओं से जुड़ी योजनाओं और सुविधाओं पर खर्च किया जा सकता है। इसमें अस्पतालों की सुविधाओं को मजबूत करना, नई सेवाएं शुरू करना और स्वास्थ्य ढांचे में सुधार शामिल है।
पिछले से बड़ा हो सकता है ये बजट
पिछले साल 2025-26 के लिए एक लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया था, जो उससे पहले के 76 हजार करोड़ रुपये से 31.5 फीसदी ज्यादा था। इस बार का बजट इससे भी बड़ा हो सकता है। कुल मिलाकर, बजट से पहले सरकार ने ऐसे संकेत दिए हैं जो आम जनता की उम्मीदों को बढ़ा रहे हैं, अब नजर इस बात पर रहेगी कि घोषणाएं जमीन पर कितनी उतरती हैं।