दिल्ली में छाई प्रदूषण की चादर
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राजधानी में पिछले दो दिनों से हवा में हो रहा सुधार शुक्रवार को थम गया। हवा की दिशा में बदलाव और रफ्तार में कमी होने की वजह से औसतन वायु गुणवत्ता सूचकांक 339 दर्ज किया गया। जबकि एक दिन पहले 314 और गुरुवार को यह 344 दर्ज किया गया था। वहीं, दिल्ली- एनसीआर में शामिल गाजियाबाद में 382 वायु गुणवत्ता सूचकांक के साथ लोगों ने सबसे खराब हवा में सांस ली।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु मानक संस्था सफर के अनुसार, गुरुवार को दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में 1,447 पराली जलने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इससे उत्पन्न होने वाले पीएम 2.5 के प्रदूषण में करीब 14 फ़ीसदी हिस्सेदारी दर्ज की गई है। जबकि एक दिन पहले पराली के धुएं की हिस्सेदारी पांच फ़ीसदी से भी कम दर्ज की गई थी। प्रदूषण के लिए जिम्मेदार तत्वों में शामिल पीएम10 और पीएम 2.5 के सूक्ष्म कणों में भी इजाफा हुआ है।
पीएम 10 का स्तर जहां 299 दर्ज किया गया है वहीं, पीएम 2.5 का स्तर 168 रहा। जबकि एक दिन पहले पीएम 10 का स्तर 276 और पीएम 2.5 का स्तर 153 दर्ज किया गया था। पीएम 10 का स्तर का 100 से कम व पीएम 2.5 का स्तर 60 से कम होने पर सुरक्षित माना जाता है।
सफर के मुताबिक, शुक्रवार से हवा की दिशा उत्तर- पश्चिम की ओर हो गई है और आगामी दो दिनों तक हवा के इसी दिशा में बने रहने की संभावना बनी हुई है। हालांकि, सोमवार से हवा का रुख एक बार फिर पूर्वी दिशा की ओर होने की संभावना बनी हुई है। इसके साथ ही हवा की रफ्तार में भी इजाफा हो सकता है। परिणाम स्वरूप दिल्ली- एनसीआर की फिजा में प्रदूषण के छंटने की उम्मीद भी बनी हुई है।
वहीं, दिवाली के बाद पश्चिमी विक्षोभ के भी सक्रिय होने की संभावना है। इस वजह से सोमवार को दिल्ली में बारिश के आसार बन रहे हैं जिससे प्रदूषण को छंटने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि एक दिन पहले सफर ने चेतावनी जारी की है कि दिवाली की रात तक प्रदूषण का स्तर बहुत खराब से लेकर गंभीर श्रेणी में पहुंच सकता है। हालांकि, इस बार पटाखें न जलने की वजह से पिछले चार वर्षों में पीएम 2.5 का स्तर कम रहेगा।
दिल्ली एनसीआर के आंकड़े
फरीदाबाद- 319
गाजियाबाद- 382
ग्रेटर नोएडा -336
गुरुग्राम -324