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दिल्ली: पांच वर्ष में एम्स को नहीं मिले नए डॉक्टर, तीन माह में चार इस्तीफे

Tue, 12 Mar 2019 02:50 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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एम्स, दिल्ली (फाइल फोटो)
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देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स को जहां सरकार विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने का दावा कर रहा है। वहीं, पिछले पांच साल में डॉक्टरों की कमी को सरकार पूरा करने में नाकामयाब रही। यही नहीं संस्थान से लगातार जा रहे नामचीन डॉक्टरों को रोकने में भी सरकार असमर्थ रही, जिसका परिणाम है कि पिछले तीन माह के दौरान चार नामचीन और अनुभवी डॉक्टरों ने एम्स को अलविदा कह दिया। 

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एम्स के हड्डी रोग विभाग के वरिष्ठ डॉ. सीएस यादव हाल ही में अपनी सेवाओं से मुक्ति लेकर दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में मरीजों का इलाज कर सकते हैं। वहीं उनसे पहले पिछले माह कार्डियोलॉजी विभाग के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने भी इस्तीफा दे दिया। सूत्रों की मानें तो ये डॉक्टर पिछले कई वर्षों से एम्स में मरीजों का उपचार कर रहे थे। साथ ही हृदय से जुड़े कई बड़े शोध भी इन्होंने किए हैं। इन्हें एम्स ट्रामा सेंटर भेजा जा रहा था, लेकिन बताया जा रहा है कि उन्होंने ट्रामा सेंटर जाने से साफ इंकार कर दिया था।

शायद इसी अनबन के चलते उन्होंने अपना इस्तीफा दिया। जबकि इनसे पहले एम्स के ही पल्मोनरी और प्रसूति विभाग के दो वरिष्ठ डॉक्टर करीब 20 साल से भी ज्यादा देने के बाद सेवा मुक्त हो चुके हैं। वैसे एम्स से डॉक्टरों के इस्तीफे का सिलसिला नया नहीं है। वर्ष 2017 में भी करीब पांच डॉक्टरों ने संस्थान से सेवा मुक्ति लेकर निजी अस्पतालों का दामन थामा। जानकारों की मानें तो कुछ राजनीति तो कुछ आकर्षक पैकेज मिलने के कारण सेवाएं छोड़ देते हैं। एम्स में रहते हुए इनकी मेहनत और लगन से प्रसिद्धि हासिल होने के बाद इन्हें निजी क्षेत्र में काफी फायदा मिलता है। सूत्र यहां तक बताते हैं कि एम्स में रहते हुए कुछ डॉक्टरों का लक्ष्य पद्मश्री अवार्ड भी रहता है। 

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डा. यादव का इस्तीफा देना बड़ा नुकसान

कुछ ही समय पहले इस्तीफा देने वाले हड्डी रोग विभाग के वरिष्ठ डॉ. सीएस यादव घुटना एवं कूल्हा प्रत्यारोपण में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तक बना चुके हैं। ये साल में एक बार लेह-लद्दाख जाकर वहां के लोगों के लिए शिविर लगाकर सर्जरी करते हैं। पहाड़ों के लोगों में घुटने और कूल्हे की समस्या ज्यादा होती है। इसके अलावा हड्डी रोग (ऑर्थो) के क्षेत्र में डॉ. सीएस यादव कई बड़े शोध भी कर चुके हैं। भले ही डॉ. सीएस यादव ने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है, लेकिन एम्स के सूत्र संस्थान के लिए इसे बड़ा नुकसान मान रहे हैं। 

993 संकाय पदों में से 304 रिक्त 
प्राप्त जानकारी के अनुसार एम्स में करीब 993 संकाय पदों में से 304 रिक्त पड़े हुए हैं, जबकि मरीजों का भार हर साल बढ़ता जा रहा है। एम्स की ओपीडी भी सालाना 40 लाख मरीजों से ऊपर पहुंच चुकी है। जबकि एम्स में सालाना ऑपरेशन की संख्या भी 1 लाख 94 हजार से ऊपर जा चुकी है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि इन सब के बीच डॉक्टरों की भारी कमी से आखिरकार एम्स कब तक उभर पाएगा?
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