डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने और मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दिल्ली स्थित मदर एम्स ने देश के बाकी एम्स को डिजिटल बनाने का बीड़ा उठाया है।
जल्द ही देश के अन्य राज्यों में स्थित एम्स में ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट सिस्टम शुरू किया जाएगा। इसके लिए दिल्ली के एम्स के साथ बाकी राज्यों के एम्स की बैठक भी हो चुकी है, जिसमें तकनीकी सहयोग देने पर समझौता हुआ है।
दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की कंप्यूटराइजेशन कमेटी देश के छह राज्यों में खुले एम्स को सूचना प्रौद्योगिकी से लैस करेगा। सबसे पहले मरीजों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था शुरू की जाएगी।
यहां के कर्मचारी ही देंगे प्रशिक्षण
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इसमें पुराने और नए मरीज संबंधित एम्स की वेबसाइट पर जाकर इलाज के लिए पंजीकरण करा सकेंगे। इसके अलावा मदर एम्स के सर्वर से बाकी एम्स को जोड़ा जाएगा। इससे अस्पताल के स्टोर रूम में उपलब्ध दवा के साथ दूसरी सर्जिकल वस्तुओं की जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
मरीज के इलाज के बाद बिलिंग और गरीब मरीजों को इलाज में मिलने वाली आर्थिक छूट की जानकारी मुख्य एम्स के सर्वर से ही बाकी एम्स को मिल जाएगी। लैब में जांच के बाद मरीजों की रिपोर्ट भी ऑनलाइन हो जाएगी। साथ ही यह रिपोर्ट संबंधित डॉक्टर के स्मार्ट फोन पर भी उपलब्ध होगी।
मदर एम्स आईटी एक्सपर्ट के अलावा नर्सों को भी ट्रेनिंग देगा क्योंकि मरीजों से जुड़े ज्यादातर काम में वे सीधे तौर पर शामिल होती हैं। एम्स विशेषज्ञ दूसरे राज्यों के एम्स जाकर अथवा संबंधित एम्स से कर्मचारी दिल्ली बुलाकर प्रशिक्षण देंगे।
एम्स देश के बाकी राज्यों के एम्स को हर स्तर पर मदद देगा
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उत्तराखंड-ऋषिकेश, बिहार-पटना, छत्तीसगढ़-रायपुर, उड़ीसा-भुवनेश्वर, राजस्थान-जोधपुर और मध्य प्रदेश-भोपाल में एम्स है। एम्स कंप्यटराइजेशन कमेटी के चेयरमैन डॉ दीपक अग्रवाल कहते हैं कि दिल्ली एम्स देश के बाकी राज्यों के एम्स को हर स्तर पर तकनीकी मदद देगा।
नलाइन पंजीकरण से लेकर लैब रिपोर्ट को ऑनलाइन करने के लिए दिल्ली एम्स की ओर से दूसरे राज्यों के एम्स को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा। एम्स में करीब दो वर्ष से कंप्यूटरीकरण पर काम चल रहा है और इसके बड़े ही सकारात्मक परिणाम आए हैं।
अभी तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और पंजीकरण से 20 लाख मरीजों को लाभ मिल चुका है